एनजीटी ने चीनी मिल पर 25 लाख रुपये, एचएसपीसीबी पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया
पानीपत। एनजीटी ने पानीपत सहकारी चीनी मिल पर वायु प्रदूषण के कारण पर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जागरूकता और बहाली के लिए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को जमा करने का आदेश दिया। इसके अलावा, एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को डीएलएसए को 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। संजय कॉलोनी से वकील अमित कौशिक ने इस साल जनवरी महीने में एनजीटी के सामने शिकायत दर्ज की थी और चीनी मिल द्वारा पर्यावरण में हो रहे एसपीएम को नियंत्रित करने की दिशा मांगी थी। गौरतलब है कि गत दिनों पहले पाया गया था कि मिल का बॉयलर 600 एसपीएम से अधिक प्रदूषण कर रहा था। जो मानकों से चार गुना अधिक है। इसके कारण स्थानीय निवासियों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा था। जो प्रदूषण गतिविधियां एयर (रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1 9 81 के साथ-साथ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1 9 86 का उल्लंघन कर था। कौशिक ने कहा, मैंने खतरे को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और चीनी मिल प्राधिकरण से संपर्क किया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।शिकायत के बाद, एचएसपीसीबी ने नमूने एकत्र किए जो पैरामीटर में विफल रहे। इसके अलावा, एचएसपीसीबी ने 18 अक्टूबर को चीनी मिल को बंद करने का नोटिस भी दे दिया था। जिसके बाद मिल द्वारा बॉयलर को ठीक करवाया गया व उसमें आवश्यक बदलाव करवाए गए। एनजीटी ने चीनी मिल पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और आवेदक को मुआवजे के रूप में कुल जुर्माना में से एक लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसने आगे आदेश दिया कि शेष राशि को राज्य कानूनी प्राधिकरण के परामर्श से डीएलएसए द्वारा उचित योजना बनाकर जागरूकता और पर्यावरण की बहाली पर खर्च करना होगा। एनजीटी ने प्रदूषण को सक्षम करने के अपने कर्तव्यों में विफलता के लिए एचएसपीसीबी पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया और डीएलएसए के साथ राशि जमा करने का भी निर्देश दिया।