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सेंट्रल जेलों में बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट को अधीक्षक बनाना गलत: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब की 6 सेंट्रल जेलों में अधीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट को नियुक्त करने के पंजाब सरकार के फैसले को गलत करार देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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याचिका दाखिल करते हुए बलजीत सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि अक्तूबर 2020 को पंजाब सरकार ने राज्य की 6 सेंट्रल जेलों में अधीक्षक के तौर पर बीएसएफ के अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला लिया था। बीएसएफ के 6 डिप्टी कमांडेंट को इसके लिए चयनित किया गया था और प्रतिनियुक्ति के आधार पर उन्हें सेवाएं देने की जिम्मेदारी दी थी। याचिकाकर्र्ताओं ने कहा कि वह जेल उपाधीक्षक के तौर पर कार्य कर रहे हैं और बीएसएफ के अधिकारियों के आने से पहले जेल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। याचिका में कहा गया कि जेल अधीक्षक की जिम्मेदारियों के बारे में बीएसएफ के अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं होती क्योंकि उनका कार्य अलग होता है। जेल अधीक्षक का कार्य कैदियों में सुधार और अनुशासन से जुड़ा होता है, जबकि बीएसएफ का काम सरहद की निगरानी, तस्करी रोकना आदि होता है।
पंजाब सरकार ने याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि योग्यता की बात करें तो कोई भी याचिकाकर्ता इस समय जेल अधीक्षक पद के लिए तय योग्यता मानक पूरा कर प्रमोशन के लिए हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बिना नियमों में संशोधन किए इस प्रकार प्रतिनियुक्ति आधार पर जेल अधीक्षक पद को नहीं भरा जा सकता। ऐसे में प्रतिनियुक्ति के आधार पर जेल अधीक्षक पद पर 6 डिप्टी कमांडेंट को नियुक्त करना सही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए बीएसएफ डिप्टी कमांडेंट की जेल अधीक्षक के तौर पर नियुक्ति को खारिज कर दिया।
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