चंडीगढ़। पंजाब में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के गोदामों में खुले में स्टोर किया गया गेहूं साल-दर-साल सड़ता रहा। कई स्थानों गेहूं का यह नुकसान 88 से 100 फीसदी तक आंका गया है। पंजाब विधानसभा की सरकारी कारोबार कमेटी ने कैग की रिपोर्ट के हवाले से संबंधित विभाग की 2014-2017 तक की कारगुजारी पर सवाल खड़े किए हैं। गोदामों में बारिश और धूप के कारण गेहूं के भंडार सड़ते रहे और कई जगह गेहूं के भंडार गायब होने के मामले भी सामने आए। इस पूरे मामले में 235.25 करोड़ रुपये के नुकसान की रिकवरी के लिए जो मैकनिजम बनाया गया, वह भी सफल साबित नहीं हुआ है।
पंजाब विधानसभा में पेश की गई कमेटी की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन ने गोदामों में निर्धारित स्टाफ की नियुक्ति ही नहीं की और केवल एक कर्मचारी तैनात कर काम चलाया। इसके कारण 2014 से 2017 तक प्रत्येक वर्ष 88 से 100 फीसदी तक गेहूं बर्बाद हो गया। कमेटी ने पाया कि इस नुकसान की भरपाई के लिए विभाग द्वारा जो कोशिशें की गईं, वह भी ठोस साबित नहीं हुईं। कारपोरेशन के मोगा, बठिंडा व मुक्तसर के जिला कार्यालयों की सितंबर 2014 से जून 2016 की जांच में पाया गया गोदामों में खुले में स्टोर की गई गेहूं की पर्याप्त संभाल नहीं की गई और न ही समय पर कीटनाशक आदि का छिड़काव किया गया। इस जिला दफ्तरों में गेहूं 62 प्लिंथ में भंडार की गई थी, जिनमें से 26 प्लिंथ में 26.97 से 100 फीसदी गेहूं खराब हो गई। इसी तरह 2017-18 की आडिट रिपोर्ट में उक्त 26 प्लिंथ में भंडार की गई 1.86 लाख टन गेहूं में से 0.88 लाख टन (47.31 फीसदी) गेहूं खराब हुई।
कमेटी ने माना कि गेहूं को खुले में स्टोर करने के कारण यह नुकसान हुआ, जिसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं लेकिन कमेटी ने पाया कि विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों के बजाय छोटे मुलाजिमों को कसूरवार ठहराते हुए उन पर नुकसान की रिकवरी डाल दी। इनमें फर्टिलाइजर क्लर्क पर 1.56 लाख, टेक्निकल असिस्टेंट पर 26 करोड़, स्टोर मैनेजर पर 77 लाख रुपये की रिकवरी डाल दी गई। कमेटी का कहना है कि यह रिकवरी किसी स्थिति में नहीं हो सकती क्योंकि नियमानुसार किसी भी मुलाजिम के वेतन से 40 फीसदी से अधिक की कटौती नहीं की जा सकती। कमेटी ने विभाग से पूछा है कि उच्च अधिकारियों को जिम्मेदारी से अलग कैसे रखा गया? कमेटी का मानना है कि निचले स्तर के मुलाजिम अपने दम पर इतनी बड़ी गड़बड़ी नहीं कर सकते। कमेटी ने कहा है कि विभाग द्वारा 235.25 करोड़ की बड़ी राशि 15 कर्मचारियों से वसूलने के लिए चार्जशीट जारी की हैं लेकिन इनमें से अनेक कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं और कुछ कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। कमेटी ने हिदायत की गई है कि पूरी रिकवरी उच्चाधिकारियों से की जाए।