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हम सनातनी हैं, किसी को मुसीबत में कैसे छोड़ देते : विक्रम

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पंचकूला। जान पर खेलकर उफनती घग्गर नदी से 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला संगीता को बचाने वाले खड़क मंगोली के युवाओं की चर्चा मंगलवार को पूरे शहर में रही। इन युवाओं ने जहां इंसानियत का फर्ज निभाया, वहीं बहादुरी की मिसाल पेश की। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी इन युवाओं की प्रशंसा की।बता दें कि हादसे के वक्त अनिल, बबलू, विक्रम, किशन, पप्पू, महेंद्र, रमेश, सलीम खान, रंजीत, संजू और देव माजरी पुल से गुजर रहे थे। जब उन्होंने कार सवार महिला को सैलाब में फंसे देखा तो बिना देर किए उफनती धारा में उतर गए। विक्रम ऑटो चलाते हैं, उन्होंने बताया कि महिला कार सहित पानी के तेज बहाव के बीच फंसी थी। वह कार की खिड़की से बचाने की गुहार लगा रही थी। मुझसे से देखा नहीं गया। हम सनातन धर्म से जुड़े लोग हैं। किसी को मुसीबत में कैसे छोड़ सकते हैं। 52 वर्ष के रमेश उर्फ पप्पू भी ऑटो चलाते हैं, उन्होंने पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने पहली बार नदी में डूब रहे किसी व्यक्ति की जान बचाई है। 27 वर्षीय छोटे लाल राज मिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने इससे पहले 2009 में घग्गर नदी में आए तेज बहाव के दौरान दो बच्चों की जान बचाई थी। वहीं, 33 वर्षीय का राजू भी ऑटो चालक हैं। उन्हें किसी ने कहा कि छोटा बच्चा कार समेत नदी में बह रहा है। यह सुनकर वह खुद को रोक नहीं सके और उसे बचाने नदी में चले गए।
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बोल और सुन नहीं पाते बबलू, फिर भी कूद पड़े नदी में
बचाव दल में शामिल बबलू बचपन से ही बोल और सुन नहीं पाते, लेकिन महिला को कार समेत बहते देख अपने आप को रोक नहीं पाए और तेज लहरों के बीच में कमर में रस्सी बांधकर दोस्तों के साथ महिला की जान बचाने के लिए घग्गर नदी में कूद पड़े। बबलू पूरे दिन घग्गर तट पर चढ़ावे का सामान एकत्रित कर उन्हें बेचने का काम करते हैं। जो पैसे उसे मिलते हैं, उसी से घर की रोजी रोटी चलती है। बबलू की पत्नी भी दिव्यांग हैं।
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