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भाजपा नेता बोले- किसान विरोधी नहीं कृषि विधेयक, एमएसपी थी, एमएसपी है और एमएसपी रहेगी

Mon, 21 Sep 2020 10:33 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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केंद्र सरकार से हरसिमरत कौर के इस्तीफे के बाद आयोजित भाजपा की दूसरी कोर कमेटी की बैठक में नेताओं ने कृषि विधेयक की वकालत की। नेता बोले, केंद्र का कृषि विधेयक किसानों के पक्ष में है, बस उसे पढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसंरचना फंड भी बनाया है।
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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की अध्यक्षता में कोर ग्रुप की एक बैठक प्रदेश भाजपा कार्यालय चंडीगढ़ में हुई। बैठक में अश्वनी शर्मा ने कहा कि कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 में किसानों को उनकी उपज के विक्रय की स्वतंत्रता, किसान एवं व्यापारी को कृषि उपज मंडी अथवा मंडी से बाहर अन्य माध्यम से बेचने का प्रावधान किया गया है।

किसान अपनी फसल को राज्य के भीतर या देश में किसी भी स्थान पर बेच सकता है। शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार कह रही है कि एमएसपी थी, एमएसपी है तथा एमएसपी रहेगी। लेकिन कांग्रेस तथा अन्य नेता बार-बार किसानों को इस मुद्दे पर गुमराह कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि मंडियां भी यथावत रहेंगी तथा मंडी में आने वाला फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है ।
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गिनाए विधेयक के लाभ
शर्मा ने कहा कि कृषक (सशक्तिकरण व सरंक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 में किसान व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाईयों, निर्यातकों से सीधे जुड़ेंगे। जिससे कृषि करार करके किसान को उपज का मूल्य निर्धारण तथा दाम बढ़ने पर सीधे अतिरिक्त लाभ मिलेगा। नए कानून में बाजार की अनिश्चितता से किसान का बचाव होगा।

किसान को उसकी उपज के दाम का तीन दिन के भीतर भुगतान करना व किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना, किसी विवाद की स्थिति में उसका निपटारा 30 दिन में सुनिश्चित किया जाना, किसान को उसके अनुबंध में पूर्ण स्वतंत्रता व अपने खेतों में ही फसल बेचने का अधिकार प्रदान करने जैसे प्रावधान रखे गए हैं।

विपक्षी किसानों को गुमराह कर रहे
प्रदेश भाजपाध्यक्ष ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रदेश की कांग्रेस सरकार तथा आप के नेता कृषि संबंधी विधेयक को लेकर किसानों व आम जनता को गुमराह कर रहे हैं। प्रदेश का माहौल बिगाड़ा जा रहा है। विपक्षी नेता राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए भोले-भले किसानों व आम जनता को बलि का बकरा बना रहे हैं।
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