हरियाणा कैडर की आईएएस रानी नागर के निशाने पर अब चंडीगढ़ के यूटी गेस्ट हाउस प्रशासन है। आईएएस से इस्तीफा देकर अपने पैतृक घर गाजियाबाद लौट चुकीं रानी यूटी गेस्ट हाउस को लेकर एक के बाद एक खुलासे कर रही हैं।
वीरवार को सोशल मीडिया में उन्होंने यूटी गेस्ट हाउस प्रशासन पर खाने में कील परोसने का आरोप लगाया था तो शुक्रवार को उन्होंने टूटे दरवाजे वाला कमरा देने का आरोप लगा दिया। उनके आरोपों पर यूटी गेस्ट हाउस प्रशासन ने चुप्पी साध ली है। अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। यूटी के निदेशक आतिथ्य सत्कार राकेश पोपली से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई पर उनका फोन नहीं उठा।
उन्होंने व्हाट्सऐप पर संदेश भेजने पर बैठक में होने की बात कही। उन्होंने अतिरिक्त निदेशक राजीव तिवारी का नंबर बात करने के लिए दिया, लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया, न ही व्हाट्सऐप पर संदेश का कोई जवाब दिया। रानी नागर ने अपने फेसबुक एकाउंट पर लिखा है कि यूटी गेस्ट हाउस के जिस कमरा नंबर 311 में वह बहन रीमा के साथ रहीं, उसका दरवाजा टूटा हुआ था।
शिकायत के बावजूद यूटी गेस्ट प्रशासन ने उसे ठीक नहीं किया। कर्फ्यू के दौरान कमरे का दरवाजा किसी ने बाहर से चाबी लगाकर खोल लिया था। वह कमरे के अंदर ही थीं। हल्की सी चिटकनी की रोक हटने पर दरवाजा पूरा खुलने से पहले ही उन्होंने बहन के साथ मिलकर घरेलू समान के बैग दरवाज़े के अंदर की तरफ लगा दिए, ताकि कोई अंदर न आ सके। दरवाज़े में लगी दूसरी चिटकनी ख़राब रहती थी व अंदर से बंद नहीं होती थी।
कर्फ्यू में उन्होंने व बहन ने बारी-बारी जागकर अपनी सुरक्षा की। रानी ने एक बार फिर अपील की है कि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार होने से रोकने न के लिए आंदोलन न करें। अगर इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ व एनपीएस फंड न मिला तो जल्दी भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।