माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। ईलू, आस्कर, रॉकी, बाबी, ड्रोना और सटिला जंगली जानवरों और चंदन की तस्करी पर लगाम लगाएंगे। इसके लिए इन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के पंचकूला में स्थित भानू ट्रेनिंग सेंटर में नौ माह की ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिंग के बाद इस माह छह डॉग्स को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया गया है। इन डाग्स को कमांड देने के लिए 12 जवानों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, क्योंकि इन्हीं जवानों के इशारे पर यह काम करेंगे। पंचकूला आईटीबीपी ट्रेनिंग सेंटर के महानिदेशक ईश्वर सिंह दूहन ने बताया कि देश में सांप की खाल, गैंडे के सींग, बाघ और तेंदुए के शरीर के विभिन्न हिस्सों और हाथी के दांत की बड़े स्तर पर तस्करी होती है। इसी तस्करी को रोकने के लिए वाइल्ड लाइफ ला एनफोर्समेंट एजेंसी डॉग स्क्वायड तैयार कर रही है। ट्रेनिंग का मकसद डाॅग्स की मदद से विस्फोटक, नशीले पदार्थों, वन्यजीव संरक्षण या अपराधियों की खोज करना है।
इशारों को भांप लेता है, जर्मन शेफर्ड नस्ल का ईलू
ईश्वर सिंह दुहन ने बताया कि ईलू बहुत ही चतुर है। यह वन्य जीवों की रखवाली करने में बेहद मददगार साबित होगा। उसकी तैनाती मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की रखवाली के लिए किया गया है। जहां गेट और पार्क के आसपास ईलू पेट्रोलिंग करेगा। उन्होंने बताया कि यह काफी फूर्तिला है। उसे इशारों को समझने से लेकर उठना व बैठना अच्छे तरह से आता है।
यहां किए तैनातआस्कर-काली टाइगर रिजर्व, कर्नाटक
राकी- कुद्रेमुख वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी कर्नाटक
बाबी-वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार
ड्रोना-राजीव गांधी नेशनल पार्क कर्नाटक
सटिला- राजीव गांधी नेशनल पार्क कर्नाटक