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Panchkula News: आईएएस अफसरों, कारोबारी के खातों से हुआ लेन-देन, ईडी खंगाल रही रिकॉर्ड

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चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 137 करोड़ रुपये के अमरूद बाग घोटाले के मामले में पंजाब के दो आईएएस और कारोबारी के बैंक खातों की डिटेल खंगालनी शुरू कर दी है। ईडी के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अमरूद बाग घोटाले के दौरान आईएएस अफसरों और कारोबारी के बैंक खातों से कई ट्रांजेक्शन (लेन-देन) हुए हैं। ईडी इनकी डिटेल खंगाल कर आगे पूछताछ करेगी। दरअसल अमरूद बाग घोटाले में गमाडा द्वारा जो जमीनें अधिग्रहण की जानी थीं, उन पर फल व अन्य पेड़ लगाकर और ज्यादा पेड़ दिखाकर गौर कानूनी तरीके से मुआवजे की मोटी रकम वसूल की गई। कई आरोपियों तक मुआवजे व घोटाले के पैसे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन भी हुए हैं। यहां तक कि कई लोगों को घोटाले के पैसे पहुंचाने के लिए फर्जी कंपनियों और उनके रिश्तेदारों के जरिये पैसे पहुंचाए गए हैं। ईडी इन सबकी जांच कर रही है।
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बताया जा रहा है इस घोटाले में ईडी के रडार पर कई आईएएस, पीसीएस और विभाग के सुपरिंटेंडेंट और अन्य पद पर कार्यरत अधिकारी भी शामिल हैं। ईडी ने ऐसे 18 से 19 संदिग्ध अफसरों की लिस्ट तैयार की है, जिनसे भविष्य में पूछताछ या उनके ठिकानों पर रेड कर घोटाले से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं।

अफसरों की कॉल डिटेल, डंप डाटा रिकवर करने में जुटी ईडी
ईडी ने बीते वीरवार को पंजाब के एक्साइज कमिश्नर आईएएस अधिकारी वरुण रूजम, फिरोजपुर के डीसी राजेश धीमान और कारोबारी भूपिंदर सिंह के ठिकानों से 3.89 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। इसके अलावा आईएएस और कारोबारी के ठिकानों से संपत्ति के दस्तावेज, मोबाइल फोन और घोटाले से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करने के उद्देश्य से की गई छेड़छाड़ के साक्ष्य भी जुटाए थे। ईडी के अधिकारी ने बताया जब्त किए मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड और डंप डाटा रिकवर किया जा रहा है। इसमें दोनों आईएएस और कारोबारी के मोबाइल फोन शामिल हैं।
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कॉल डिटेल्स खोलेगी बाकी अफसरों के घोटाले में राज
ईडी को इनपुट मिला है कि इस घोटाले में व्हाट्सएप कॉल और अन्य एप के जरिये कई अफसरों, बिल्डरों और अन्य लोगों से बातचीत हुई है। ईडी कॉल डिटेल्स निकालकर इस घोटाले में शामिल अन्य अफसरों की राज खोलेगी।
2018 में पट्टे पर ली गई जमीन पर 2016 से लगे दिखाए पौधे
यह घोटाला ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। गमाडा ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए रेट घोषित किया। जमीन पर लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत अलग मुआवजे के तौर पर दी थी। जमीन पर जितने भी फलदार पेड़ थे, उनकी कीमत बागवानी विभाग ने निर्धारित की थी। गमाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर इनकी उम्र 4 से 5 साल दिखाई गई। हाईकोर्ट ने मामले में अलग-अलग दोषी लाभार्थियों को कुल 72.36 करोड़ रुपये की रकम जमा करवाने का आदेश दिया, जिसमें से अब तक 43.72 करोड़ जमा करवाए जा चुके हैं। गमाडा की ओर से अधिग्रहण की जाने वाली जमीन पर नियम से अधिक अमरूद के पौधे लगाए थे। आरोप है कि जिन लोगों ने जमीन पट्टे पर ली, उन्होंने प्रति एकड़ दो से ढाई हजार पेड़ दिखाए। आरोप यह भी है कि इन्होंने 2018 में जमीन पट्टे पर ली थी और तभी वहां अमरूद के पौधे लगाए। अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रिकॉर्ड में इन पौधों को 2016 से दिखाया गया।
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