पंचकूला में चंडीमंदिर टोल प्लाजा का मासिक पास होने के बावजूद फास्टैग से टोल के पैसे काटने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आईसीआईसीआई बैंक और हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। शिकायतकर्ता अनिता कुमारी ने उपरोक्त दोनों के खिलाफ उपभोक्ता आयोग को शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह पिंजौर में रहती हैं और पंचकूला राजकोष कार्यालय में नौकरी करती हैं। वह रोजाना कार से चंडीमंदिर टोल प्लाजा को पार कर जॉब पर आती है। उसने इसके लिए मासिक पास भी बनवाया हुआ है। इसके 150 रुपये प्रतिमाह फास्टैग से कटते हैं। 31 अक्तूबर 2019 को पास होने के बावजूद टोल प्लाजा पार करने पर उसके खाते से 930 रुपये कट गए। शिकायतकर्ता ने इसके लिए आईसीआईसीआई बैंक को ऑनलाइन शिकायत की और पैसे रिफंड करने की मांग की। एक सप्ताह इंतजार करने के बाद भी बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं आया। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग से की थी।
उपभोक्ता आयोग ने आईसीआईसीआई बैंक और हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड को 80 हजार रुपये पीजीआई गरीब रोग कल्याण कोष को देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही दस-दस हजार रुपये शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 330 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित, दस हजार रुपये मानसिक नुकसान और 5,500 हजार रुपये अदालती खर्चा अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि भविष्य में ऐसे अनुचित व्यवहार को अपनाने से बचें। इसके साथ ही अदालत ने मुआवजे की राशि 45 दिनों के अंदर शिकायतकर्ता और पीजीआई गरीब रोग कल्याण कोष को देने के आदेश दिए हैं। आदेशों की पालना ना करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 71,72 के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
टोल प्लाजा ने कहा, तकनीकी गड़बड़ी से कटे पैसे
हिमालयन एक्सप्रेस वे ने अदालत में दलील दी कि आईसीआईसीआई बैंक की तकनीकी गड़बड़ी के कारण पैसे कटे। अन्य 44 ग्राहकों के साथ भी ऐसा हुआ। ग्राहकों की बाकी के कटे पैसे 600 रुपये आगे के पास में एडजस्ट कर दिए गए थे। शिकायतकर्ता के पैसे फरवरी 2020 से मई 2020 तक ग्राहक से टोल प्लाजा पार करने का भी पैसा नहीं लिया गया। शिकायतकर्ता की 180 रुपये की राशि अभी देय है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि टोल प्लाजा और बैंक की अनुचित व्यापार व्यवहार में संलिप्तता स्पष्ट रूप से बड़ी है। स्थानीय क्षेत्र के यातायात से निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलना प्रतिबंधित था, इसलिए अधिसूचना और प्रावधानों का उल्लंघन करके निर्धारित राशि से अधिक राशि वसूलना स्पष्ट रूप से अमान्य और अवैध था।
आईसीआईसीआई बैंक ने अपने पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ी की घटना का खंडन नहीं किया है, जिसके कारण शिकायतकर्ता को छोड़कर 44 अन्य ग्राहकों से अतिरिक्त राशि की कटौती हुई। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने बैंक में शिकायत दर्ज कराई थी जिसे टोल प्लाजा और बैंक हल करने में विफल रहे। इसलिए टोल प्लाजा और बैंक ने शिकायतकर्ता को सेवाएं प्रदान करते समय कमी की जिसके लिए वे शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है।