पंचायत चुनाव की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां से अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले कई लोगों ने राजनीति के चरम को छुआ है। लोकतंत्र के पहले पायदान पर कदम रखने के बाद विधानसभा में पहुंचे हैं और मुख्यमंत्री तक के पद पर विराजमान हुए हैं। पंच, सरपंच और जिला परिषद से सियासी सफर शुरू करने वाले इन नेताओं में सबसे पहले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल का नाम आता है। इनके अलावा, अभय चौटाला, बलराज कुंडू के नाम शामिल हैं।
पंच से मुख्यमंत्री बने भजन लाल
भजनलाल ने वर्ष 1960 में आदमपुर ग्राम पंचायत में पंच का चुनाव लड़ा तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह राजनीति की इतनी ऊंचाइयों को छुएंगे। इसके बाद चौधरी भजन लाल ने 1961 और 65 में हिसार जिला परिषद से सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। तीनों चुनाव में जीत के बाद भजन लाल ने 1968 में आदमपुर से चुनाव लड़ा और विधानसभा में पहुंचे। इसके बाद चौधरी भजन लाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका विजयी अभियान जारी रहा और 28 जून 1979 को हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। चौधरी भजन लाल ने तीन बार प्रदेश की बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाली। इसके अलावा, वह केंद्र में कृषि मंत्री भी रहे।
अभय चौटाला और कर्ण चौटाला जिला परिषद सदस्य रहे
दूसरा नाम अभय चौटाला का है। 2005 में वह सिरसा से जिला परिषद के सदस्य बने और बाद में जिला परिषद के चेयरमैन भी बने। वह हरियाणा में नेताप्रतिपक्ष भी रह चुके हैं और मौजूदा समय में ऐलनाबाद से इस्तीफा देने के बाद दोबारा से विधायक चुने गए हैं। इनके अलावा, अभय चौटाला की पत्नी कांता चौटाला ने भी 2016 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा थ, लेकिन वह हार गई थी। जबकि अभय के बेटे कर्ण चौटाला ने उस समय जिला परिषद सदस्य के तौर पर जीत हासिल की थी।
बलराज कुंडू - जिला परिषद से विधानसभा पहुंचे
मौजूदा समय में महम से आजाद विधायक बलराज कुंडू भी जिला परिषद के सदस्य रह चुके हैं। 2016 में उन्होंने रोहतक जिला परिषद से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वह जिला परिषद के चेयरमैन भी रहे। इसके अलावा, जिला परिषद एसोसिएशन हरियाणा के भी चेयरमैन चुना गया था। पिछली बार विधानसभा में कुंडू ने ताल ठोकी तो लोगों ने उनको विधानसभा तक पहुंचाया।