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मनप्रीत बोले- पंजाब का आरडीएफ रोकने की तैयारी में केंद्र, सुखबीर ने कहा- किसानों संग नाइंसाफी

Thu, 29 Oct 2020 02:33 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल। (फाइल फोटो)
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केंद्र और पंजाब सरकार के संबंधों में खटास लगातार बढ़ने लगी है। केंद्र ने पंजाब में मालगाड़ियों की आवाजाही रोकने के बाद राज्य का जीएसटी बकाया देने पर भी चुप्पी साध ली है। गेहूं व धान की खरीद पर राज्य को दिए जाने वाले रुरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) के 1500-1700 करोड़ रुपये रोकने की भी तैयारी कर ली है।

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केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब सरकार द्वारा संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद विधि विशेषज्ञों द्वारा केंद्र और राज्य के बीच तनातनी बढ़ने की जो आशंका जताई थी, वह सही साबित होती दिखाई देने लगी है। वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने जीएसटी के 9500 करोड़ रुपये की बकाया राशि को लेकर केंद्र पर सीधा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि अपने वित्तीय कुप्रबंधन को सुधारने के बजाय केंद्र राज्यों के हिस्से पर नजरें गढ़ा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र जल्दी ही पीडीएस के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन की व्यवस्था बंद करने के साथ-साथ केंद्रीय राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी घटाने की साजिश भी रच रहा है। 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में राज्यों की 42 फीसदी की राजस्व हिस्सेदारी पर केंद्र डाका डाल सकता है।

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उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि कोरोना संकट के कारण राजस्व में कमी आई है। मनप्रीत बादल ने कहा है कि कोरोना संकट का बहाना बनाया जा रहा है। गत अप्रैल से अब तक 9500 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया केंद्र पर बाकी है लेकिन अब केंद्र उस पैसे को भी इस बहाने के साथ हड़पने की कोशिश में है कि बकाया चुकाने को केंद्र सरकार 1.10 लाख करोड़ का कर्ज लेगी। केंद्र ने राज्यों को धोखा देने का यह नया बहाना ढूंढ लिया है।

उधर, केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को हर साल दिए जाने वाले 1500-1700 करोड़ रुपये भी बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह पैसा पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पूल के लिए गेहूं व धान की खरीद के एवज में 3 फीसदी आरडीएफ के रूप में लिया जाता रहा है।

जानकारी के अनुसार, केंद्र ने पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पूल के लिए खरीदी गई धान की मीलिंग के खर्च का ब्योरा मांगा है, जिसमें मंडी फीस, लेबर चार्ज, मीलिंग का खर्च, आढ़तियों की फीस, बैग का खर्च आदि का ब्योरा तो शामिल किया गया है लेकिन आरडीएफ को इससे बाहर कर दिया गया है। पंजाब फूड एंड सप्लाई विभाग का मानना है कि इस तरह केंद्र ने आरडीएफ का पैसा रोकने के संकेत दे दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि इस साल पंजाब सरकार को धान की एमएसपी पर खरीद से करीब 650 करोड़ रुपये और आगामी गेहूं की खरीद से करीब 850 करोड़ रुपये मिलना तय था, जिस पर केंद्र सरकार ने प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विभाग की निदेशक अनंदिता मित्रा के अनुसार, आरडीएफ के बारे में विभाग ने पूरा ब्योरा तैयार करना शुरु कर दिया है और जल्दी ही अधिकारियों को विस्तृत विवरण के साथ दिल्ली भेजा जाएगा।
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आरडीएफ के भुगतान को मना करना किसानों के साथ नाइंसाफी : सुखबीर

शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि केंद्र सरकार आरडीएफ के भुगतान को मना कर किसानों के साथ नाइंसाफी कर रही है। केंद्र ऐसा कर किसानों के साथ बदले की भावना से कार्य कर रहा है। शिअद अध्यक्ष ने केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान की खरीद के सीजन के लिए बढ़ाई गई कैश क्रेडिट लिमिट में आरडीएफ के लिए कोई प्रावधान नहीं करने की निंदा करते हुए कहा कि इससे पंजाब में खाद्यान्न खरीद प्रणाली पर बुरा असर पड़ेगा। 

आरडीएफ से राज्य को मिलने वाले धन, जो लगभग 1850 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष था, इसका उपयोग 1800 मंडियों और 70 हजार किलोमीटर ग्रामीण संपर्क सड़कों के रखरखाव के लिए किया गया था। बादल ने कहा कि पंजाब पहले से ही राज्य में मालगाड़ियों के न चलने के कारण आर्थिक नाकेबंदी की चपेट में है। अब किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधा के लिए बनाए बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं करना चाहिए। 

सब्जियों की भी एमएसपी तय करे सरकार
शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस सरकार से केरल पैटर्न का पालन करने तथा फलों तथा सब्जियों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। शिअद विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने यह मांग करते हुए कहा कि सरकार को एक नवंबर को पंजाब दिवस पर स्कीम को शुरू करना चाहिए। इसके साथ ही पंजाब सरकार हस्तक्षेप करे और केंद्रीय एजेंसियों के ऐसा करने में विफल रहने की स्थिति में कपास और मक्का की खरीद भी सुनिश्चित करे।
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