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पंचकूला: दूसरे ट्रायल में भी हांफने लगा इंजन, टकसाल से वापस हुआ ट्रेन सेट

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टकसाल तक पहुंचने में ट्रेन का इंजन होने लगा गर्म, इंजीनियरों ने सेट को दोबारा कालका वापस भेजा संवाद न्यूज एजेंसी
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कालका। वर्ल्ड हेरिटेज कालका-शिमला रेलमार्ग पर रविवार को ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) का दूसरी बार भी ट्रायल फेल रहा। करीब छह किलोमीटर चलने के बाद इंजन गर्म हो गया। इसको फिर टकसाल से कालका भेज दिया गया। सुबह 09:40 बजे ट्रेन सेट को कालका से रवाना किया गया जो 11:18 बजे वापस कालका पहुंच गया। कालका में इंजीनियर इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पूर्व वीरवार को भी पहले ट्रायल में करीब पांच सौ मीटर चलने के बाद इंजन में तकनीकी खराबी आ गई थी। इस कारण पहला ट्रायल भी फेल हो गया था।
पहले ट्रायल में यह थी दिक्कत इससे पहले वीरवार को ट्रेन सेट का पहला ट्रायल किया गया था। उस दौरान करीब 10:50 बजे ट्रेन सेट को कालका से रवाना किया गया था। करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर जाकर ड्राइवर केबिन वाले कोच के एक इंजन में तकनीकी खराबी आने के चलते ट्रेन सेट आगे न जा सका। उस दिन ट्रेन सेट को शिमला तक जाना था। यहां यह भी बता दें कि ट्रेन सेट के ट्रायल के लिए आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) की टीम लखनऊ से कालका पहुंची हुई है।
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ट्रायल सफल नहीं हो पाया है। इंजन गर्म होने की वजह से बीच रास्ते में ट्रायल बंद कर दिया गया। तकनीकी दिक्कतें अभी दूर नहीं हुई हैं।
- मनदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला रेल मंडल

कोटी तक होना था ट्रायल
ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) को ट्रायल के दौरान रविवार को कालका से कोटी तक जाना था। सुबह करीब 09:40 बजे ट्रेन सेट कालका से रवाना हुआ। इंजन गर्म होने कारण टकसाल से वापस भेज दिया गया है। यह 11:18 बजे तक कालका रेलवे स्टेशन पर वापस पहुंच गया था। - सीताराम मीणा, कालका रेलवे स्टेशन अधीक्षक
ट्रेन सेट की यह है खासियत

सभी कोचों में लगे हुए हैं कैमरे
इस ट्रेन सेट में सफर करने पर सैलानियों को एक अलग ही अनुभूति होगी। ट्रेन सेट शानदार सीटों के साथ-साथ, एसी, हीटर, वाशरूम, एलईडी और डिस्प्ले बोर्ड सहित अन्य सुविधाओं से लैस है। कोच में सैलानियों की सीट के साथ ही पैनिक स्विच लगा हुआ है। कोई भी परेशानी होने पर सैलानी पैनिक स्विच का इस्तेमाल कर सकते हैं। इतना ही नही सभी कोचों में कैमरे लगे हैं। ड्राइवर केबिन पर लगी एलईडी स्क्रीन से तीनों कोचों में हो रही प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। सभी सीटों में पास चार्जिंग की सुविधा भी है। इमरजेंसी होने पर ड्राइवर केबिन के पास इमरजेंसी डोर भी बनाया गया है। सैलानी कौन से स्टेशन पर पहुंच गए हैं, आगे कौन सा स्टेशन आने वाला है इस बाबत कोच में दो स्क्रीन भी लगाई गई हैं। ट्रेन सेट की प्रत्येक सीट के पीछे टेबलनुमा-ट्रे लगी हुई है ताकि सैलानी यात्रा के दौरान आराम से उक्त ट्रे पर भोजन इत्यादि खाद्य सामग्री रखकर उसका आनंद ले सकें।
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कोच के अंदर ही लगे हैं इंजन
रेल मंत्रालय ने कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) चलाने का फैसला लिया है। सामान्य गाड़ियां जहां कालका से शिमला पहुंचने में पांच घंटे लगाती हैं, रेल मोटरकार साढ़े चार घंटे में शिमला पहुंचती है। वहीं, नए ट्रेन सेट इनसे कम समय में शिमला पहुंचेगी। इस गाड़ी को इंजन रहित ट्रेन भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोच को खींचने के लिए इंजन नहीं लगता। कोच के अंदर ही इंजन होता है। ट्रेन सेट में कुल तीन कोच लगे हैं जिसमें दो कोच ड्राइवर सीट वाले हैं। इसमें 19-19 यात्री और मध्य वाले कोच में 23 सैलानी बैठ सकेंगे। तीनों कोचों में कुल छह इंजन लगे हैं।
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