माई सिटी रिपोर्टरपंचकूला। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों, आवारा कुत्तों और संरक्षित पशुओं के आतंक ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बंदर और कुत्ते राह चलते और घरों में घुसकर लोगों को काट रहे हैं, वहीं संरक्षित पशु भी वाहन चालकों और अन्य के लिए मौत का कारण बन रहे हैं। एक सप्ताह पहले पिंजौर के बिटना रोड पर घाटीवाला स्थित सब्जी मंडी में खेल रही पांच वर्षीय बच्ची की एक लावारिस सांड़ के हमले में मौत हो गई थी। एक सप्ताह पहले सेक्टर-25 में बंदरों ने एक बच्चे को दौड़ा दौड़कर काटा। बंदरों के आतंक का सिलसिला यहीं नहीं थमा। वीरवार को भी घर के बाहर खेल रही एक छह साल की बच्ची पर बंदरों ने हमला कर उसे घायल कर दिया। बंदरों, संरक्षित पशुओं और लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के लिए लोगों ने प्रशासन से कई बार गुहार लगाई है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। पेश है केस स्टडी के साथ रिपोर्ट...।
केस नंबर एक
सेक्टर-25 निवासी 10 वर्षीय वंश को एक सप्ताह पहले बंदरों ने दौड़ा दौड़ाकर काटा था। अब भी उसके जख्म भर नहीं पाए हैं। वह इतना सहम गया है कि वंश खेलने के लिए घर से बाहर भी नहीं निकलता। वंश ने बताया कि अपने तीन दोस्तों के साथ घर के बाहर खड़ा था, तभी अचानक 20 से 25 बंद आए और उन्हें दौड़ा लिया। उसके दो दोस्त भागने में कामयाब हो गए। वह बंदरों के बीच घिर गया और उसे बंदरों ने काट लिया।
उसे अबतक दो इंजेक्शन लग चुके हैं और एक इंजेक्शन लगना अभी बाकी है।
केस नंबर दो
सेक्टर-25 निवासी विराट सैनी ने बताया कि उनकी छह साल की बच्ची वीरवार को घर के बाहर खेल रही थी। वह अपनी पत्नी के साथ बालकनी में खड़े थे, तभी आठ-दस बंदरों ने उनकी बच्ची को दौड़ा लिया। वह नीचे गिर गई और उसके जांघ पर बंदर ने काट लिया। पहले ही आवारा कुत्तों और लावारिस पशुओं से लोग परेशान थे, अब बंदरों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
केस नंबर तीन
सेक्टर-25 निवासी गीता थापा ने बताया कि वह दस दिन पहले छत से कपड़े उतारने गई थी। अभी सुखने के लिए डाले पकड़े उतार ही रही थी कि चार पांच बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वह जोर से चिल्लाई। आसपास के लोग एकत्रित हो गए। गनीमत रहा कि बंदरों ने काटा नहीं।
केस नंबर चार
सेक्टर-25 निवासी पुष्पा सिगरोहा ने बताया कि पिछले दो साल से सेक्टर के अंदर बंदरों ने आतंक मचा रखा है। बंदरों ने लोगों के घरों पानी के टैंक तोड़ा। मेरा पूरा गार्डन बंदरों ने अस्त व्यस्त कर दिया है। गमले तोड़ दिए हैैं। जब से डंपिंग ग्राउंड झूरीवाला में शिफ्ट हुआ है, उधर के बंदर सेक्टरों में आ गए हैं। इस संबंध में सेक्टर के लोग प्रशासन सहित नगर निगम को कई बार ज्ञापन दे चुके हैैं, लेकिन अबतक समस्या का समाधान नहीं निकला।
क्या कहते हैं लोग
सेक्टर-25 में बंदरों की समस्या से लोग परेशान हैं। इस संबंध में शुक्रवार को हमलोग नगर निगम कमिश्नर से मिले थे, इसका जल्द नगर निगम को कोई स्थायी समाधान निकालना चाहिए। राजेंद्र कुमार, रिटायर्ड डीएसपी।
पिछले दो ढ़ाई साल से सेक्टर में बंदरों की समस्या है। जब से झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट किया गया है। बंदर घाटी के सारे बंदर इधर आ गए हैं। इसका नगर निगम को कोई स्थाई हल निकालना चाहिए। वीरेंद्र सिंह, निवासी सेक्टर-25 पंचकूला।
सेक्टर-25 के लोग शुक्रवार को बंदरों की समस्या के संबंध में नगर निगम कार्यालय में उनसे मिले थे। समस्या गंभीर है। विभाग इसका अगले सप्ताह समाधान करेगा। तब तक स्थानीय लोगों से अपील है कि बंदरों को सेक्टरों के अंदर खाना न दें। उनके लिए बंदर घाटी चिन्हित की गई है। - वीरेंद्र लाठर, कमिश्नर, नगर निगम