पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि कर दाताओं के पैसे से वीआईपी दिखावे और स्टेटस सिंबल के लिए सुरक्षा नहीं दी जा सकती है। किसी व्यक्ति को राज्य के खर्च पर सुरक्षा तब तक नहीं दी जानी चाहिए, जब तक इसके लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां न हों। साथ ही सुरक्षा तब तक ही दी जानी चाहिए, जब तक खतरा टल न जाए।पटियाला निवासी एक राजनीतिक संगठन के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रधान ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने पाया कि याची अपने वीआईपी दर्जे को दिखाने के लिए सुरक्षा मांग रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि हथियारों से लैस दो पुलिस अधिकारियों की चौबीसों घंटे सुरक्षा होने के बावजूद याची ने पांच कमांडो के साथ एस्कॉर्ट वाहन की मांग करने का कोई उचित कारण नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि इस याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।
याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि खतरा वास्तविक नहीं है तो करदाताओं के पैसे पर सुरक्षा प्रदान करना अनुचित होगा। राज्य को विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्तियों का एक वर्ग नहीं बनाना चाहिए। जस्टिस बत्रा ने कहा कि सीमित सार्वजनिक संसाधनों को विवेकपूर्ण तरीके से आवंटित किया जाना चाहिए, समाज के समग्र कल्याण और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, न कि विशिष्ट एजेंडे वाले व्यक्तियों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए।
खंडपीठ ने कहा कि पंजाब पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करता है। दुर्भाग्य से राज्य नशीली दवाओं और हथियारों की तस्करी सहित अवैध गतिविधियों का सामना कर रहा है। ऐसे में पुलिस बल को अपनी पूरी क्षमता से काम करने की आवश्यकता है। राज्य पुलिस की भूमिका मूल रूप से समाज में शांति, कानून और व्यवस्था बनाए रखने की तथा आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित होती है। पुलिस की जिम्मेदारी व्यक्तियों को व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करना नहीं है, जिसमें महत्वाकांक्षी या प्रमुख व्यक्ति भी शामिल हैं, जब तक कि उनकी सुरक्षा को कोई विश्वसनीय खतरा न हो।