चंडीगढ़। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के नए भारत की नींव तैयार करने वाली है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ शिक्षाविदों व विद्यार्थियों के अभिभावकों को आगे आकर नीति के क्रियान्वयन के महायज्ञ में आहुति डालनी होगी। नई नीति में वर्ष 2030 तक उच्चतर शिक्षा में सकल पंजीकरण अनुपात (ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो) 50 प्रतिशत तक करना है। यह वर्तमान में देश में 26 व हरियाणा में 32 प्रतिशत तक है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं लगाकर हरियाणा ने देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हिमाचल व गुजरात के बाद हरियाणा देश में अव्वल स्थान पर रहा है। हरियाणा ने देश में सबसे पहले इस नीति के क्रियान्वयन की पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने से पहले ही प्रदेश में 1000 प्ले स्कूल खोलने की योजना तैयार की जा चुकी है। इसके अलावा 98 संस्कृति मॉडल स्कूल भी खोले जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की उस पहल का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने राजभवन में शिक्षाविदों की चार दिवसीय डिजिटल संगोष्ठी का आयोजन करवाया। इसमें 250 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्राचार्यों, मुख्याध्यापकों व अन्य शिक्षाविदों ने अपने सुझाव दिए। सुझावों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में समायोजित किया जाएगा। कंवर पाल ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने 7 सितंबर को सभी प्रदेशों के राज्यपाल की संगोष्ठी नई दिल्ली में बुलाई है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्त्रिस्यान्वयन की रूपरेखा की समीक्षा की जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत
शिक्षा मंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि कोविड-19 को स्नातक व स्नातकोत्तर की अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाएं न करवाने को आधार नहीं माना जा सकता। राज्यों के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की योजना के अनुसार 30 सितंबर तक परीक्षाओं का आयोजन करना है। यदि कोई राज्य इस अवधि में परीक्षाएं करवाने में असमर्थ है तो उसे यूजीसी को आग्रह करना चाहिए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब एक विद्यार्थी स्नातक स्तर तक की पढ़ाई में 14 वर्ष तक मेहनत करता है और उसे वाजिब डिग्री न हासिल हो तो उसे उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन करवाने की तैयारी कर चुका है।