उन्होंने बताया कि बैठक में सभी जत्थेबंदियों ने दिल्ली पुलिस द्वारा कोरोना का हवाला देते हुए किसान आंदोलन पर पांबदी लगाने की कोशिशों की निंदा की। किसान नेताओं ने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान भाजपा ने बड़ी-बड़ी रैलियां कीं लेकिन अब किसानों की आवाज दबाने के लिए पाबंदी लगाई जा रही है। किसान नेताओं ने फैसला किया है कि वे सरकार के तानाशाही रवैये का मुंहतोड़ जवाब देंगे।
दिवाली पर भी धरना रहेगा जारी
बुर्जगिल ने बताया कि बैठक में यह भी फैसला किया गया कि दिवाली के मौके पर किसान अपने धरनास्थलों पर डटे रहेंगे और इस दिन मशालें जगाई जाएंगी। किसान संगठनों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि गन्ने की बकाया राशि का किसानों को तुरंत भुगतान किया जाए और गन्ने का दाम कम से कम 350 रुपये तय किया जाए। संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जेलों में नजरबंद बुद्धिजीवियों को तुरंत रिहा किया जाए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार आलोचकों की आवाज को दबाना बंद करे।
असफल रही थी केंद्र और किसानों की पहली बैठक
कृषि कानूनों का किसान बीते डेढ़ महीने से विरोध कर रहे हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने 14 अक्तूबर को भी पंजाब के किसान संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया था लेकिन उस बैठक में केंद्र का कोई मंत्री नहीं पहुंचा था। वह बातचीत बेनतीजा रही थी। उस बैठक में किसानों के बात करने केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल को भेजा गया था। इस पर किसान संगठन वापस लौट आए थे। हालांकि उस समय किसान संगठनों ने एलान किया था कि वे अब दिल्ली नहीं जाएंगे और अगर केंद्र को उनसे बात करनी है तो वह चंडीगढ़ आए।