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कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार से किसानों की बातचीत आज, संगठनों ने न्योता स्वीकारा

Fri, 13 Nov 2020 02:35 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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किसान संगठन की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के 30 किसान संगठनों ने कृषि कानून पर बातचीत के लिए केंद्र सरकार के भेजे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। केंद्र के साथ यह बैठक 13 नवंबर को नई दिल्ली में सुबह 11:30 बजे होगी। यहां किसान भवन में गुरुवार को किसान नेता हरमीत सिंह कादियां की अध्यक्षता में आयोजित बैठक करीब पांच घंटे तक चली।

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किसान संगठनों की अगली बैठक किसान भवन में ही 18 नवंबर को बुलाई गई है। भारतीय किसान यूनियन एकता (ढकोंदा) के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने बैठक के बाद बताया कि कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ दिल्ली में बैठक के लिए तीन प्रतिनिधि डॉ. दर्शनपाल, बलबीर सिंह राजेवाल और कुलवंत सिंह संधू के नाम तय किए गए हैं।

इसके अलावा देशभर के करीब 500 किसान संगठनों के नेतृत्व में 26 व 27 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में फैसला किया गया कि पंजाब से हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में दिल्ली के लिए कूच करेंगे और वहां आंदोलन में हिस्सा लेंगे। 

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उन्होंने बताया कि बैठक में सभी जत्थेबंदियों ने दिल्ली पुलिस द्वारा कोरोना का हवाला देते हुए किसान आंदोलन पर पांबदी लगाने की कोशिशों की निंदा की। किसान नेताओं ने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान भाजपा ने बड़ी-बड़ी रैलियां कीं लेकिन अब किसानों की आवाज दबाने के लिए पाबंदी लगाई जा रही है। किसान नेताओं ने फैसला किया है कि वे सरकार के तानाशाही रवैये का मुंहतोड़ जवाब देंगे। 

दिवाली पर भी धरना रहेगा जारी  
बुर्जगिल ने बताया कि बैठक में यह भी फैसला किया गया कि दिवाली के मौके पर किसान अपने धरनास्थलों पर डटे रहेंगे और इस दिन मशालें जगाई जाएंगी। किसान संगठनों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि गन्ने की बकाया राशि का किसानों को तुरंत भुगतान किया जाए और गन्ने का दाम कम से कम 350 रुपये तय किया जाए। संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जेलों में नजरबंद बुद्धिजीवियों को तुरंत रिहा किया जाए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार आलोचकों की आवाज को दबाना बंद करे।

असफल रही थी केंद्र और किसानों की पहली बैठक
कृषि कानूनों का किसान बीते डेढ़ महीने से विरोध कर रहे हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने 14 अक्तूबर को भी पंजाब के किसान संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया था लेकिन उस बैठक में केंद्र का कोई मंत्री नहीं पहुंचा था। वह बातचीत बेनतीजा रही थी। उस बैठक में किसानों के बात करने केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल को भेजा गया था। इस पर किसान संगठन वापस लौट आए थे। हालांकि उस समय किसान संगठनों ने एलान किया था कि वे अब दिल्ली नहीं जाएंगे और अगर केंद्र को उनसे बात करनी है तो वह चंडीगढ़ आए। 
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