चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया, पंजाब के एडवोकेट जनरल, हरियाणा के एडवोकेट जनरल, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष और सचिव के साथ 16 दिसंबर को बैठक कर हाईकोर्ट के कर्मियों को राज्य कर्मियों के समान सुविधा देने पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।गत वर्ष जून में एकल बेंच ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि संविधान के अनुसार न्यायपालिका राज्य का एक अविभाज्य अंग है। चाहे संविधान में शक्तियों का विभाजन किया गया है लेकिन हाईकोर्ट तय नियमों से चलता है और इसके कर्मी भी उसी लाभ के अधिकारी हैं जो राज्य सरकार के कर्मियों को दिए जाते हैं। बेंच ने कहा था कि हाईकोर्ट के कर्मियों को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी कर्मियों के समान ही माना जाएगा।
एकल बेंच ने अपने आदेश में साफ कर दिया था कि हाईकोर्ट कर्मचारियों को हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ के वे सभी लाभ दिए जाएंगे जो वे अपने कर्मचारियों को देते हैं, जैसे कि शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण, हाउसिंग सोसायटी में कोटा व अन्य किसी तरह का भी लाभ जो सरकार अपने कर्मचारी को देते हैं।
हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ जैसे अपने कर्मचारियों को आवास सुविधा उपलब्ध कराते हैं, उसी तरह हाईकोर्ट के कर्मचारियों को भी आवास सुविधा मोहाली व पंचकूला में उपलब्ध करानी होगी। इसके खिलाफ हरियाणा समेत अन्य ने एकल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। खंडपीठ ने एकल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी थी और तब से यह मामला विचाराधीन है।