चंडीगढ़। पुलिस की गाड़ी को ओवरटेक के लिए साइड न देने पर एनडीपीएस के फर्जी मामले में ड्राइवर को फंसाने वाले पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर लिया गया है। याची के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के साथ ही कपूरथला में एनडीपीएस के सभी मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एसआईटी गठित कर दी गई है। कपूरथला के एसएसपी ने हलफनामा दाखिल कर हाईकोर्ट में यह जानकारी दी है। लवप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एनडीपीएस के झूठे मामले में फंसाने का पुलिस पर आरोप लगाते हुए एफआईआर रद्द करने और अंतरिम जमानत की मांग की थी। एफआईआर के अनुसार लवप्रीत सिंह ने पुलिस को देखकर तेजी से गाड़ी चलाना शुरू कर दिया और उसे नशीले कैप्सूल के साथ पकड़ा गया था। एफएसएल रिपोर्ट से पता चला कि भेजे गए नमूने पैरासिटामोल के थे। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए।
कपूरथला के एसएसपी ने हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों को लाइन हाजिर कर लिया गया है। याची के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी गई है और इस टीम की ओर से दर्ज सभी मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी इस मामले की भी जांच करेगी कि एफआईआर सही है या नहीं। एसआईटी पीड़ित को मुआवजा देने पर चार सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
एसएसपी की तरफ से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट देने के लिए चार सप्ताह की भी मांग की गई जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। सुनवाई के दौरान याची के वकील जगजीत सिंह ने इस मामले में याची को मुआवजा देने की भी अपील की। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि पुलिस का एनडीपीएस अधिनियम का दुरुपयोग कानून में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।