संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-5 के शालीमार ग्राउंड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। साध्वी कालिंदी भारती ने श्रीमद्भागवत महापुराण की व्याख्या करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत अर्थात जो श्री से युक्त है। श्री अर्थात् चैतन्य, सौंदर्य, ऐश्वर्य। भाव की वो वाणी, वो कथा जो हमारे जड़वत जीवन में चैतन्यता का संचार करती है। जो हमारे जीवन को सुंदर बनाती है वो श्रीमद्भागवत कथा है। यह एक ऐसी अमृत कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। इसलिए परीक्षित ने स्वर्गामृत की बजाए कथामृत की ही मांग की।
वृंदावन इंसान का मन है। कभी-कभी इंसान के मन में भक्ति जागृत होती है परंतु वह जागृति स्थाई नहीं होती। इसका कारण है कि हम ईश्वर की भक्ति तो करते हैं पर वैराग्य नहीं, तड़प नहीं, भाव नहीं और ज्ञान नहीं। इसलिए वृंदावन में जाकर भक्ति देवी तो तरुणी हो गई पर उसके पुत्र ज्ञान और वैराग्य वृद्धावस्था में अचेत और निर्बल पड़े हैं। उनमें जीवंतता और चैतन्यता का संचार करने हेतु नारद जी ने भागवत कथा का ही अनुष्ठान किया। इसको श्रवण कर वो पुन. जीवंत और सबल हो उठे। व्यास जी कहते हैं कि भागवत कथा एक कल्पवृक्ष की भांति है। जो जिस भाव से कथा श्रवण करता है उसे मनोवांछित फल देती है। श्रीमद्भागवत कथा से प्राप्त होने वाली शिक्षा को हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
इस मौके पर मुख्यातिथि प्रवीण गोयल एमडी सौरव केमिक्लस, संजय रूंगटा एवं सुनीता रूंगटा सीईओ बोनसाई फार्मा ग्रुप ऑफ कंपनीस, तेजवंत राय जिंदल एवं कुसुम जिंदल नचिकेता पेपर मिल्स, सतीश जिंदल एमडी माया गार्डन, दीपक जिंदल डायरेक्टर माया गार्डन सहित अन्य गण्यमान्य उपस्थित रहे।