पंचकूला। तीन दिवसीय पांचवें चित्र भारती फेस्टिवल का समापन मास्टर क्लास, 133 फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ हुआ। रेड बिशप कांप्लेक्स में चल रहे फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। इनमें आठ शार्ट फिल्में, आठ डाॅक्यूमेंट्री, 11 कैंपस एनएफ (डाॅक्यूमेंट्री) और चार कैंपस प्रोफेशनल फिल्में रहीं। भारत की बात विषय पर सुप्रसिद्ध फिल्म लेखक अमिताभ वर्मा और विनोद अनुपम ने मास्टर क्लास ली। वहीं, दूसरी मास्टर क्लास फिल्म डायरेक्शन पर थी, जोकि विपुल अमृत लाल शाह, अमित राय और आकाशादित्य लामा ने ली।
इन आठ शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग
1. एन्तान्ग्लेद - साईनाथ एस उस्काइकर (निर्देशक)
2. मिस्सिंग सिंस 6.12.1956 - आनंद पांडे (निर्देशक)
3. बटवारा - शिव तिवारी (निर्देशक)
4. शक्ति - धीरेंदर पाखुरिया (निर्देशक)
5. पथवनी - अमोल घाटे (निर्देशक)
6. सी-ग्रेड वाला - अमित माथुर (निर्देशक)
7. माटी.कॉम -विवेक उपाध्याय (निर्देशक)
8. ए ड्रीम ऑफ़ ए विंडो - रूपकमल हजारिका (निर्देशक)
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आठ डाॅक्यूमेंट्री
1. सुंदरबन प्रोव्र्बिअल डेविल एंड द दीप सी - अरिंदम कोनार,श्याम सुंदर पॉल (निर्देशक)
2. त्याग : मोर देन - शिवांश राजन खन्ना (निर्देशक)
3. रम्माण - एक विरासत - नरेंद्र धाकड़ आमीन (निर्देशक)
4. वृंदावन द ह्यूमन सेंचुरी - शुभांक चैबे (निर्देशक)
5. बैतूल विरासत - बैतूल - विरासत, विकास और सोंदर्य की धरोहर रयकी खड़िया। -संदीप पोनीकर (निर्देशक)
6. लैंड ऑफ पस्सेस -विशाल सेठी (निर्देशक)
7. प्रोजेक्ट रेल -प्रज्ञा सिंह (निर्देशक)
8. जर्नी ऑफ ताडोबा अंधारी टाइगर रिसीवर- प्रशांत काधे (निर्देशक)
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कैंपस एनएफ (डाॅक्यूमेंट्री)
1. अर्ध : एक अनोखा समिष्टि - राजन मिश्रा (निर्देशक)
2. मिठाई मोहब्बत और दिल्ली की दास्तां - कुहू वर्मा (निर्देशक)
3. शांति कुंज:-आस्था का महासागर - अंकुर त्रिपाठी (निर्देशक)
4. द फडिंग सफायर - ईशान हर्ष (निर्देशक)
5. ज्योतिसर –हेमंत (निर्देशक)
6. ताल तरंग त्यौहार - देवलीना सरकार और प्रिया प्रभु (निर्देशक)
7. होम ब्रूज़: स्ट्रगलस फॉर ए ट्रेडिशन परंपरा के लिए संघर्ष - गुंजन कश्यप (निर्देशक)
8. द पर्पल रेवोलुशन ओं व्हील्स - शरण्या दयाल (निर्देशक)
9. बूडी गंगा – बूडी गंगा - ज्ञानेश शर्मा (निर्देशक)
10. द लॉस्ट रिवर - भूमि भाटी (निर्देशक)
11. बैस्ट आयज - अहसान खान और सरिता (निर्देशक)
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कैंपस प्रोफेशनल (डाॅक्यूमेंट्री)
1. नवदुर्गा - दीपेश पालीवाल (निर्देशक)
2. गल देव - तनिष्क भूरिया (निर्देशक)
3. केवल एक गांव - लव कुमार (निर्देशक)
4. दुलारी जिन्होंने मिथिला पेंटिंग को फिर से परिभाषित किया - विकास कुमार (निर्देशक)