हरियाणा सरकार सरस्वती नदी को सींचेवाल मॉडल पर साफ करेगी। यमुनानगर व कुरुक्षेत्र जिलों में सींचेवाल मॉडल पर 25 ‘तरल अपशिष्ट प्रबंधन’ सिस्टम लगाए जा रहे हैं। सरस्वती नदी के किनारे स्थित गांवों से बहकर नदी में आने वाले प्रदूषित पानी को साफ करने की दिशा में सरकार तेजी से जुट गई है।
पर्यटन मंत्री कंवर पाल ने बताया कि सरस्वती के जीर्णोद्धार के लिए गंभीर रूप से प्रयासरत हैं। पर्यटन मंत्री ने यह जानकारी बुधवार को यहां सरस्वती हेरिटेज डेवलेपमेंट बोर्ड के विभिन्न प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक के बाद दी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सरस्वती नदी के जीर्णोद्घार के लिए हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित सोम नदी पर एक बांध बनाने का निर्णय लिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार इस बांध के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दे चुकी है। अब सिंचाई विभाग ने केंद्रीय जल आयोग के पास बांध के डिजाइन के लिए केस भेजा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि आदि बद्री के स्थान पर सोम नदी के नीचे की ओर एक बैराज भी प्रस्तावित है, जिससे भूमिगत पाइप लाइन के माध्यम से गांव रामपुर हेरिया, रामपुर कांबियान और छिल्लौर में सरस्वती जलाशय में जल प्रवाह होगा।
पर्यटन मंत्री ने अधिकारियों को सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के विभिन्न प्रोजेक्टस पर चल रहे कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल, बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजयेंद्र कुमार इत्यादि उपस्थित रहे।