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शहीदी दिवस पर उधम सिंह को किया याद, विस अध्यक्ष समेत अन्य ने दी श्रद्धांजलि

Mon, 01 Aug 2022 01:36 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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पंचकूला। सेक्टर-6 स्थित माता मनसा देवी सामुदायिक केंद्र का नामकरण रविवार को शहीदी दिवस पर शहीद उधम सिंह के नाम पर किया गया। इस मौके पर लोगों ने सरदार उधम सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पर मिटने वालों का यहीं बाकी निशा होगा। उन्होंने कहा कि वे भारत माता के वीर सपूत सरदार उधम सिंह को नमन करते हैं। उनकी शहादत को देश हमेशा याद रखेगा।

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विधानसभा स्पीकर ने कहा कि 13 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने -अपने घरों पर तिरंगा अवश्य लगाएं। उन्होंने जिले के लोगों से भी अभियान को सफल बनाने की अपील की। इस मौके पर नगर निगम के महापौर कुलभूषण गोयल, साहित्यकार एवं प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. एमएम जुनेजा, वार्ड नंबर एक के पार्षद नरेंद्र लुबाना, डॉ. महेंद्र कंबोज, जिला महामंत्री परमजीत कौर, पार्षद हरेंद्र मलिक, सुरेश वर्मा, सुनीत सिंगला, जय कौशिक सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ज्ञानचंद गुप्ता ने इस मौके पर लोगों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ऊधम सिंह 26 दिसंबर 1899 को पंजाब प्रांत के संगरूर जिले के सुनाम गांव में एक सिख परिवार में हुआ था। सन् 1901 में उधम सिंह की माता और 1907 में पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनको अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। उधम सिंह के बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था। उनको अनाथालय में उधम सिंह और साधु सिंह का नाम दिया गया।
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1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया। 1919 में अनाथालय छोड़कर क्रांतिकारियों के साथ आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। ऊधम सिंह जलियांवाला बाग की घटना से काफी विचलित थे। 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन में बैठक थी। वहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। ऊधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक में पहुंच गए। यहां उन्होंने जलियांवाला बाग का बदला लेकर डायर को गोली मार दी। इसके बाद उन्होंने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया। 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दी गई। कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह जागृति मंच के प्रधान जगदीश भगत सिंह भी मौजूद रहे। मंच का संचालन डॉ. प्रदीप राठौर ने किया।

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