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Panchkula News: विदेशी नौकरी छोड़, युवा किसानों को खेती कर दिखा रहे नई राह

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पिंजौर के बक्शीवाला पंचायत के राउवाला गांव में 6 एकड़ में अलग-अलग तरह से उगा रहे हैं सब्जियां दीपक शाही
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पंचकूला। अमेरिका में 25 लाख सालाना कंसल्टेंसी की नौकरी छोड़ युवा एनआरआई नवीनतम तकनीक अपनाकर कृषि को एक नई दिशा दे रहा है। संरक्षित खेती के जरिए करीब छह एकड़ में सब्जियां उगाकर महज एक साल में 35 से 40 लाख रुपये का कारोबार कर लिया है। पिंजौर के डीएलएफ में रहने वाले एनआरआई सुनील जिंदल बिना पेस्टीसाइड के बॉयो पेस्टीसाइड विधि से बड़े स्तर पर खेती कर रहे हैं। उनकी इस प्रयास की सर्वत्र सराहना हो रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधि भी 31 मार्च को उनके फार्म हाउस पर जाकर जानकारी हासिल करेगा। वर्तमान में सुनील खेती के साथ-साथ करीब 15 किसानों को निशुल्क जानकारी भी दे रहे हैं। उनका लक्ष्य प्रदेश को विश्व के देशों के सामने कृषि के क्षेत्र में रोल मॉडल के रूप में स्थापित करने का है। इसमें बागबानी विभाग भी सहयोग कर रहा है। मूल रूप से पंजाब बठिंडा निवासी सुनील पिंजौर में जमीन लेकर खेती कर रहे हैं।


प्रतिनिधिमंडल को देंगे तकनीक की जानकारी
31 मार्च को जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल के समक्ष खेती और नवीनतम तकनीक की प्रस्तुति के लिए हरियाणा की तरफ से उनको चुना गया है। अगर मौसम ठीक रहा तो प्रतिनिधिमंडल बक्शीवाला पंचायत के राउवाला में जाकर तकनीकी की जानकारी हासिल करेगा। अगर मौसम में ठीक नहीं हुआ तो अनिल रात्रि भोज के दौरान प्रतिनिधिमंडल को कृषि की नई तकनीक की जानकारी देंगे।
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तीन एकड़ में की नेट हाउस खेती
सुनील जिंदल ने बताया कि नेट हाउस से गैर मौसमी सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। गर्मी अधिक होने के कारण पॉली हाउस तकनीक से जून और जुलाई में सब्जी उत्पादन नहीं किया जा सकता है, जबकि नेट हाउस में इस मौसम में भी सब्जी उत्पादन किया जा सकता है। इन दिनों अधिक गर्मी होने के कारण पॉली हाउस में भी तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में नेट हाउस तकनीक काफी कारगर है। नेट हाउस में सिर्फ जाली लगी होती है और थर्मल नेट लगाया जाता है, जोकि छत पर ज्यादा धूप और सर्दी को रोकता है।
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ये सब्जियां उगा रहे हैं......
चैरी टोमैटो, फ्रेंच बीन, स्वीट कॉर्न, कोली फ्लावर, शिमला मिर्च लाल, हरा व पीला, खीरा, तरबूज, घिया, बैगन, पत्ता गोभी, मटर उगा रहे हैं।
2012 में काम छोड़कर लौटे देश
एग्रीकल्चर से बीएससी और क्रॉप साइंस में एमएससी करने के बाद अनिल जिंदल अमेरिका चले गए थे। वहां दस साल एग्रीकल्चर कंपनियों के साथ बतौर कंसल्टेंट काम करने के बाद 2012 में देश लौट गए। यहां भी विदेशी कंपनियों के साथ बतौर कंसल्टेंट काम करते रहे। उनके अनुसार जेहन में आया कि अपने देश के लिए कुछ करें, ताकि यहां के किसान दूसरे देशों में अपने कृषि को रोल मॉडल के रूप में स्थापित कर सकें। इसकी शुरुआत फरवरी 2022 में की। इसका परिणाम 2023 मार्च तक सामने आने लगा। अनिल इसका विस्तार वह पंजाब भी करेंगे।

खेती के तकनीक
-शून्य कीटनाशक अवशेषों का उपयोग कर ताजी और पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन।
-अगेती/बेमौसमी सब्जियां उगाने के लिए संरक्षित खेती पद्धतियों का उपयोग।
-बेहतर सिंचाई जल उपयोग और खरपतवार नियंत्रण के लिए प्लास्टिक मल्च का उपयोग।
-बेहतर पोषक तत्व प्रबंधन के लिए ड्रिप इरिगेशन का उपयोग।
-जैविक खाद और डीकंपोज़िंग बैक्टीरिया का उपयोग करके मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन।
-ड्रिप फर्टिगेशन और फोलियर न्यूट्रिएंट एप्लिकेशन का उपयोग करके पौध पोषण प्रबंधन।
-सिंचाई के लिए आवश्यक पानी की मात्रा की गणना करने के लिए मिट्टी की नमी, सापेक्ष आर्द्रता और तापमान सेंसर का उपयोग।
-मिट्टी में पीएच, ईसी, ओसी और अन्य पोषक तत्वों की जांच के लिए नियमित मृदा परीक्षण।
-स्वच्छ और स्वस्थ उपज उगाने के लिए ट्रेलिस सिस्टम, वर्टिकल ग्रोथ सिस्टम, क्रॉप नेट और क्रॉप कवर।
-जैव-कीटनाशकों, सोलर लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप (गंधपाश) का उपयोग करके एकीकृत कीट नियंत्रण।
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