Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन को समाप्त करने में विफलता के चलते पंजाब के डीजीपी को तलब करने के बाद अब प्रदर्शनकारियों की ओर से कोर्ट में इस मामले का हल निकालने के लिए पहल की गई है। उन्होंने अर्जी दाखिल कर मोर्चा नेताओं को इस मामले में पक्ष बनाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने अब प्रदर्शनकारियों व पंजाब सरकार को 31 मई तक मोहलत देते हुए इस मामले का हल निकालने को कहा है। साथ ही पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए अराइव सेफ सोसाइटी चंडीगढ़ ने बताया था कि सिख बंदियों की रिहाई के लिए कौमी इंसाफ मोर्चा ने चंडीगढ़-मोहाली मार्ग को बाधित किया हुआ है। पिछली सुनवाई पर इस प्रदर्शन को खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों को हाईकोर्ट ने अदालत की आंखों के धूल झोंकने का प्रयास करार देते हुए फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा था कि सरकार बाधित की गई सड़क को खाली कराने में नाकाम रही है जो न्यायालय के उदार दृष्टिकोण का नतीजा प्रतीत होता है। कोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को हाजिर होकर इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
कोर्ट के आदेश के अनुरूप बुधवार को डीजीपी गौरव यादव कोर्ट में हाजिर हुए। इसी बीच कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से एडवोकेट नवकिरण पेश हुए और इस मामले में पक्ष बनाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि पक्ष बनाने की अर्जी को रजिस्ट्री में दाखिल किया जाए। इसके बाद एडवोकेट नवकिरण ने कहा कि मोर्चा के नेता इस मामले का हल निकालने के पक्ष में हैं लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ समय दिया जाए।
इस पर पंजाब सरकार ने इस मामले का आपस में हल निकालने के लिए जुलाई तक की मोहलत मांगी। कोर्ट ने इतना समय देने से साफ इन्कार करते हुए 31 मई तक की मोहलत दी है। साथ ही पंजाब सरकार को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने डीजीपी गौरव यादव को राहत देते हुए फिलहाल उन्हें पेशी से छूट दे दी है।