चंडीगढ़। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित गोशालाओं में अब पशुओं के लिए चारे की दिक्कत नहीं आएगी। चारे के मामले में गोशालाएं खुद आत्मनिर्भर बनेंगी। गोशालाओं के अंदर ही खाली पड़ी कृषि योग्य भूमि पर हरा चारा उगाया जाएगा। चारा उगाने के लिए कृषि विभागों के माहिरों से सलाह ली जाएगी। अगर सब कुछ सही रहा तो आने वाले कुछ दिनों में यह प्रोजेक्ट साकार हो जाएगा। गो सेवा कमीशन के चेयरमैन ने भी गोशालाओं के प्रबंधकों व विभिन्न जिला अधिकारियों को इस दिशा में कार्य करने की हिदायत दी है।
पंजाब के 23 जिलों में जिला स्तरीय गोशालाएं बनी हुई हैं। जिन्हें लोकल प्रशासन द्वारा निजी संस्थाओं के सहयोग से चलाया जा रहा हैं, लेकिन अक्सर कई गोशालाओं में चारे की दिक्कत के मामले में आते रहते हैं। इतना नहीं इस वजह से पशुओं की जान तक भी गई है। यह मामला अकसर नगर काउंसिलों की मीटिंग में पार्षदों द्वारा उठाया जाता रहा है। इतना ही नहीं कई बार नगर निगमों व काउंसिलों द्वारा समय से भुगतान न होने पर भी गोशाला प्रबंधकों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी चीज को ध्यान में सरकार का थिंक टैंक काफी समय से मंथन कर रहा था। जिसके बाद अब यह योजना तैयार की गई है। इससे सरकार व गोशालाएं चलाने वाली संस्थाओं को भी फायदा होगा। उन्हें कम लागत में बढ़िया चारा मिल पाएगा। पहले चरण में यह प्रयोग जिला स्तरीय गोशालाओं में किया जाएगा। प्रयोग कामयाब रहता है तो इसे अन्य गोशालाओं में लागू किया जाएगा।
अफसरों की कमेटी करेगी पशुओं की निगरानी
राज्य की गोशालाओं में पशुओं की उचित देखभाल हो। इसको लेकर गो सेवा कमीशन की तरफ से आदेश जारी किए है। जिसमें कहा गया है गोशालाओं में पशुओं की निगरानी के लिए लोकल स्तर पर अधिकारियों की एक कमेटी बनेगी। यह कमेटी रोजाना गोशाला में जाकर सारी स्थिति का जायजा लेगी। जो रोजाना अपनी रिपोर्ट डीसी को फाइल करेगी। अगर कहीं पर कोई कमी सामने आती है तो पहल के आधार पर उसे दूर करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। गोशालाओं में बुजुर्ग व बीमार पशुओं के लिए अलग बाडे़ बनाए जाएंगे।
कोट
गोशालाओं में चारा उगाने के लिए आदेश जारी किए गए हैं। यह काम कृषि विभाग के सहयोग से आगे बढ़ेगा। इससे गोशालाओं में चारे की दिक्कत खत्म हो जाएगी।
-अशोक कुमार सिंगला चेयरमैन गो सेवा कमीशन पंजाब