चंडीगढ़। सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग के अधीन राज्यस्तरीय स्क्रूटनी कमेटी ने सुखतियार सिंह जो सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल चक्क वजीदा फाजिल्का में बतौर पंजाबी लेक्चरर काम कर रहा था, का जाली अनुसूचित जाति सर्टिफिकेट रद्द कर दिया है। इस संबंध में विभाग की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि बलवीर सिंह पुत्र निर्मल सिंह गांव आलमपुर डाकखाना कौली जिला पटियाला द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी कि फाजिल्का निवासी सुखतियार सिंह पुत्र सुच्चा सिंह ने राए सिख जाति से संबंधित होने के बावजूद अनुसूचित जाति का जाली सर्टिफिकेट बनाया है। सुखतियार सिंह ने सिरकीबंद जाति का सर्टिफिकेट बनाया हुआ था। उसने इस सर्टिफिकेट के आधार पर ईटीटी में दाखिला लिया था लेकिन जिला कल्याण अधिकारी फिरोजपुर की साल 2001 की रिपोर्ट के अनुसार, उसकी जाति गलत होने के कारण ईटीटी के चौथे सेमेस्टर का परिणाम रोक लिया गया और एससीईआरटी द्वारा ईटीटी का दाखिला रद्द कर दिया गया था।
इसके बाद सुकतियार सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल 2004 को अपने फैसले में उसे कोई राहत न देते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके बावजूद सुखतियार सिंह ने जाली सर्टिफिकेट सरेंडर नहीं किया बल्कि बीएड करके 2006 में इस सर्टिफिकेट के आधार पर पंजाबी लेक्चरर की नौकरी हासिल की।
मंत्री ने बताया कि राज्य स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी द्वारा विजिलेंस सेल की रिपोर्ट पर विचार करते हुए सुखतियार सिंह का अनुसूचित जाति सर्टिफिकेट नकली होने की पुष्टि होने पर इसे रद्द करने का फैसला किया। विभाग ने फाजिल्का और फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर सुखतियार सिंह के अनुसूचित जाति सर्टिफिकेट नंबर 577 तिथि 9 अगस्त, 1994 को रद्द करने और जब्त करने के लिए कहा गया है।