अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल द्वारा शवों की अदला-बदली के मामले में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और असिस्टेंट कमिश्नर ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी गलती मान ली है। शुक्रवार को दोनों ने कोरोना पॉजिटिव मरीज प्रीतम सिंह की मौत की जानकारी देते हुए उसके घर किसी अन्य महिला का शव भेजे जाने को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि प्रीतम सिंह की मृत्यु हो चुकी है और शव का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है और अब अस्थियां प्रशासन के पास सुरक्षित है।
इस जानकारी के बाद याचिकाकर्ता के वकील सतिंदरदीप सिंह बोपाराय ने कहा कि पहले शव बदले जा चुके हैं ऐसे में उन्हें कैसे विश्वास हो कि अस्थियां याचिकाकर्ताओं के पिता की हैं। ऐसे में बेहतर होगा की पहले अस्थियों का डीएनए परीक्षण किया जाए जिससे यह सुनिश्चित हो जाए कि अस्थियां प्रीतम सिंह की ही हैं। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि आस्तियों का डी.एन.ए. परीक्षण हो सकता है या नहीं इस पर अब बुधवार 29 जुलाई को फैसला किया जाएगा।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है। अमृतसर असिस्टेंट कमिश्नर ने अपना जवाब दायर कर स्वीकार किया था कि शव बदल गए थे और गलती से प्रीतम सिंह के घर किसी अन्य महिला का शव भेज दिया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने जवाब से असंतुष्टि जताते हुए कहा कि यह बताया ही नहीं गया है कि प्रीतम सिंह की मृत्यु हो चुकी है या नहीं लिहाजा इस पर हाईकोर्ट ने विस्तृत जवाब दिए जाने के आदेश दिए थे।
बता दें कि मृतक प्रीतम सिंह के बेटों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि मुकेरियां निवासी प्रीतम सिंह जो उनके पिता हैं 1 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, पहले उन्हें होशियापुर के रयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी में बने कोरोना आइसोलेशन सेंटर में एडमिट करवाया गया था तो बाद में अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया।
18 जुलाई को उन्हें मैसेज मिला कि उनके पिता की 17 जुलाई रात 11 बजे मृत्यु हो गई है। मृत्य के बाद जब उनके पिता के शव को एंबुलेंस के जरिये मुकेरियां भेजा गया तो वहां पता चला कि शव उनके पिता का नहीं बल्कि किसी महिला का था। इसका खुलासा होने के बाद महिला का शव मुकेरियां की मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया। इस मामले को लेकर मृतक के बेटों ने याचिका दायर की थी।