अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मशहूर शायर निदा फाजली ने कहा था कि सीधा सादा डाकिया, करता काम महान, एक ही झोले में रखे आंसू और मुस्कान। खाकी वर्दी, कंधे पर सरकारी थैला और उसमें रखी चिट्ठियां लिए वही डाकिया अब शहर के बढ़ते विस्तार से परेशानी में है।
पिछले दो दशकों में शहर का विस्तार 5 किलोमीटर से 30 किलोमीटर हो गया है। जबकि डाकियों की संख्या 150 से मात्र 74 रह गई है। 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के अवसर पर यह बात विचारणीय है कि एक ओर डाक विभाग अपनी व्यवसायिक सेवाओं से अधिक से अधिक राजस्व कमाने की अपेक्षा रखता है। वहीं डाक विभाग की पहचान रहे डाकिए कहीं हाशिए पर हैं।
जिले में इस समय एक प्रधान डाकघर और 22 अन्य पोस्ट ऑफिस हैं। सदर बाजार स्थित प्रधान डाकघर के डिप्टी पोस्टमास्टर अजय खटाना कहते हैं कि पोस्टमैन की संख्या में जो कमी आई है उसे विभाग ने ग्रामीण डाक सेवकों के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया है लेकिन वह भी नाकाफी ही लगता है। इसके अलावा अन्य पटलों पर भी स्टाफ में कमी आई है। दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि सरकार विभाग की कुछ सेवाओं के निजी हाथों में देने जा रही है। जिसके लिए विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है।
कहते हैं डाकिए
- डाक भी बढ़ी है और दायरा बहुत बढ़ गया है। इससे काफी परेशानी होती है।
-विजयपाल, डाकिया
- पहले जहां एक मकान होता था, वहीं अब कई मंजिलों के फ्लैट बन गए हैं। चिंटू यादव, डाकिया
पोस्टमैन घटे हैं और बांटने वाली डाक बढ़ी है। दूरी बढ़ी है इसी के साथ समस्या भी।- सुमित कुमार
डाकघर की कुछ प्रमुख योजनाएं
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना
डाकघर मासिक आय योजना
किसान विकास पत्र
सुकन्या समृद्धि योजना
राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र
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दो दशकों में घट गए डाकिए, फैल गया शहर बढ़ गई डाक
फोटो संख्या- 7- सुमित कुमार
फोटो संख्या- 8- चिंटू
फोटो संख्या-9- विजय पाल
फोटो संख्या-10- अजय खटाना, डिप्टी पोस्टमास्टर
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