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मजीठिया की जमानत पर गरमाई सियासत, शिअद ने आप पर सबूत न होने का लगाया आरोप

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चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के साथ ही बुधवार को राज्य की सियासत भी गर्मा गई। शिअद ने जहां मजीठिया की जमानत का स्वागत किया है, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपने-अपने तरीके से इसका विरोध किया है।
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शिअद की ओर से कहा गया कि मजीठिया को राजनीति और बदलाखोरी से प्रेरित मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिनकी हाईकोर्ट द्वारा जमानत से पार्टी की न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास की पुष्टि हुई है कि मजीठिया के खिलाफ दिसंबर 2021 में दर्ज केस में कथित अपराधों में दोषी नहीं थे। शिअद ने कहा कि यह आदेश पिछली कांग्रेस सरकार के नापाक मंसूबों के साथ-साथ वर्तमान सरकार द्वारा मजीठिया को झूठे मामले में फंसाने के प्रयासों को उजागर करता है। अकाली दल ने कहा कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि मजीठिया के खिलाफ सबूत ‘कमजोर और विश्वसनीय’ नहीं थे। पार्टी ने कहा कि इससे इस बात की भी पुष्टि हो गई है कि पूर्व मंत्री को फंसाने की साजिश रची गई थी।
उधर, पंजाब कांग्रेस ने मजीठिया को जमानत मिलने के मामले में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी के सीनियर नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अकाली दल और आप की साठगांठ के तहत ही यह पूरा मामला चल रहा है। आप सरकार की तरफ से इस केस की मजबूत पैरवी नहीं की गई, जिससे साफ है कि पार्टी इस मामले में अंदरखाते शिअद का साथ दे रही है।
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दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (आप) ने मजीठिया की जमानत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि शिअद को यह नहीं सोचना चाहिए कि मजीठिया पर लगे आरोप धुल गए हैं। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि किसी आरोपी को जमानत मिल जाने का यह अर्थ नहीं होता कि वह दोषमुक्त हो गया है। मजीठिया के खिलाफ मामला अभी अदालत में है और उन पर लगे आरोपों के पर्याप्त सबूत भी हैं।
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