संवाद न्यूज एजेंसी
पिंजौर। पीडब्ल्यूडी बीएंडआर द्वारा करीब 16 करोड़ की लागत से 6700 मीटर लंबे पिंजौर-कालका रोड समय से पहले ही जर्जर हाल में पहुंच गई है। लोगों का आरोप है विभाग ने नाला कैसे बनाया। बारिश होने पर पानी नाले में जाने की जगह सड़क पर बहता है। इसके अलावा रोड की रिकार्पेटिंग में इतना पैसा खर्च करने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है।
रोड की हालत देखकर वाहन चालकों सहित स्थानीय लोगों में रोष है।लोगों का कहना है पिंजौर सहित आसपास के क्षेत्र में बनने वाले अधिकतर रोड बनने या रिकार्पेटिंग के कुछ माह बाद ही जर्जर होना शुरू हो जाती है। लोगों ने बताया कि पिंजौर-कालका रोड बनने के दौरान उन्होंने रोड निर्माण के दौरान बरती जा रही अनियमिताओं सहित सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे, परंतु उस दौरान अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।
यह है रोड की हालत
पिंजौर-मल्लाह चाैक से लेकर कालका काली माता मंदिर तक 6700 मीटर लंबी रोड से प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है परंतु इस रोड में छोटे बड़े हजारों गड्ढे पड़ गए हैं। इसी सड़क से अक्सर पीडब्ल्यूडी सहित प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं परंतु उन्हें जर्जर सड़क नजर क्यों नहीं आती। जब से सड़क की रिकार्पेटिंग का काम पूरा हुआ तब से ही सड़क जगह-जगह टूटने से गड्ढों में तब्दील हो गई। सड़क की हालत देखकर लगता ही नहीं कि 10 माह पहले इसकी रिकार्पेटिंग हुई थी क्योंकि सड़क पर जगह-जगह गड्ढे व पैच लगे हैं।
पीडब्ल्यूडी का ड्रेनेज सिस्टम फेल
पीडब्ल्यूडी द्वारा करोड़ों की लागत से पिंजौर-कालका रोड की रिकार्पेटिंग करवाने के साथ-साथ सड़क की पानी से सुरक्षा के लिए दोनों किनारों पर ड्रेनेज के लिए नाले के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च कर दिए। हालात यह हैं कि पानी नालों में जाने की जगह सड़क पर आ रहा है। इसके अलावा कहीं नाले बना दिए गए हैं, कहीं नालों का निर्माण नहीं किया गया। कहीं नाले जमीन से काफी ऊंचे बना दिए हैं तो कहीं नाले जमीन के नीचे धंस गए हैं। लोगों की माने तो नाले निर्माण में पैसे की बर्बादी के अलावा विभाग ने कुछ भी नहीं किया।
सड़क का इतनी जल्द जर्जर हो जाना इस बात का सबूत है कि सड़क की रिकार्पेटिंग के दौरान नियमों को दरकिनार किया गया है। इसमें अधिकारियों सहित ठेकेदार की लापरवाही साफ नजर आती है। सड़क निर्माण या रिकार्पेटिंग के बाद कम से कम सड़क कुछ माह तो सही चलनी चाहिए। यह रोड तो निर्माण के दौरान और बनने के कुछ माह बाद ही टूटना शुरू हो गई। इस रोड की विजिलेंस जांच होनी चाहिए क्योंकि न तो रोड का सुधारीकरण ढंग से हुआ और न ही नाले का निर्माण सही हुआ।
- नरेश मान पूर्व ब्लॉक प्रधान कांग्रेस
पिंजौर-कालका रोड जर्जर हो चुकी है। अब इसके सही होने के लिए कई महीनों इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि अधिकारी तो डीएलपी की बात कहकर रोड को ठेकेदार से सही करवाने का आश्वासन देते रहेंगे परंतु रोड कितने दिन में सही होगी यह किसी को नहीं पता। ठेकेदार भी रोड को सही करने में समय लगाएगा ताकि डीएलपी की समयावधि खत्म हो जाए। उसे डीएलपी समयावधि में रोड को कम से कम मरम्मत करना पड़े। पहले तो रोड इतनी जल्दी खराब नहीं होनी चाहिए यदि हो जाती है तो अधिकारियों को ठेकेदार से रोड की तुरंत मरम्मत करवानी चाहिए। - विनोद कुमार