एचएसवीपी ने सर्वे भी शुरू किया, एक झुग्गी के तीन-तीन मालिक मिल रहे,
दीपक शाही
पंचकूला। शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने कवायद शुरू कर दी है। एक तरफ जहां एचएसवीपी के आठ इंजीनियर खड़क मंगोली में झुग्गियों के सर्वे में जुटे हैं, वहीं विभाग के इंजीनियरिंग विंग ने पेयजल, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर के लिए पाइप लाइन सहित सड़कों का करीब 35 कराेड़ का प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए फाइल मुख्यालय भेज दी है। काॅलोनियों के पुनर्वास को लेकर नक्शा भी तैयार किया जा रहा है। एचएसवीपी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार प्रोजेक्ट को धरातल पर दो तरह से उतारा जा सकता है। पहले जहां करीब पांच एकड़ जगह खाली पड़ी है, वहां पर पेयजल, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर के लिए पाइप लाइन डालकर वहां पर लोगों को पहले प्लॉट दे दिया जाए। उसके बाद जो जगह काॅलोनी वाले खाली करेंगे, वहां बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाए। दूसरा एचएसवीपी की स्टेट टीम का अतिक्रमण दस्ता जगह खाली करवा कर इंजीनियरिंग विंग को प्लाटिंग के लिए जगह मुहैया कराए।
सर्वे शुरू, एक झुग्गी के तीन-तीन मालिक मिल रहे
करीब दो दशक पहले खड़क मंगोली की झुग्गियों में रहने वाले 620 लोगों ने अदालत में रिट दायर की थी। उन लोगों की पहचान के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की टीम झुग्गियों का सर्वे कर रही है। इस दौरान कुछ लोगों की पहचान की गई है। उनके आधार कार्ड विभाग द्वारा लिए जा रहे हैं। वहीं जांच के दौरान एक झुग्गी के तीन-तीन मालिक मिल रहे हैं, जिसे लेकर पुनर्वास के दौरान समस्या खड़ी हो सकती है, कि प्लॉट किसे दिया जाए। सर्वे के बाद विभाग नई योजना के तहत 40 एकड़ जगह में काॅलोनियों की पुनर्वास की योजना पर काम करेगा।
एक-एक मरला का प्लॉट मिलेगा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के घोषणा के बाद राजीव काॅलोनी, इंदिरा कॉलोनी और खड़क मंगोली के पात्र लाभार्थियों को एक-एक मरले के प्लाट दिए जाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। खड़क मंगोली में एक-एक मरला के प्लॉट के लिए ड्रॉ निकाले जाएंगे। 40 एकड़ में करीब 5600 प्लॉट काटे जाएंगे। प्लाटिंग से पहले खड़ग मंगोली के हजारों परिवारों को हटाना पड़ेगा। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को विभाग कहां शिफ्ट करेगा। यह अभी तय नहीं है। यह सबसे बड़ी समस्या है।
29 साल पहले बनी योजना, आजतक सिरे नहीं चढ़ी
पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल ने सन 1994 में राजीव-इंदिरा कॉलोनी के पुनर्वास की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत कॉलोनी के पात्र लोगों को एक-एक मरले का प्लॉट मिलना था। सरकार ने एक प्लॉट की कीमत मात्र 10 हजार रुपये निर्धारित की थी। एचएसवीपी द्वारा 1994 में एक कमेटी गठित करके सर्वे करवाया। सर्वे में 5553 झुग्गियां मिली थीं और 4149 लाभार्थी परिवारों की पहचान की गई थी। इसमें 3827 लोगों को प्लॉट देने थे। इसमें से 2802 लोगों ने पैसे जमा करवा दिए। इतना ही नहीं एचएसवीपी द्वारा 306 लोगों को अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया था, लेकिन आज तक किसी भी व्यक्ति को प्लॉट नहीं मिला। जिस जगह पर प्लॉट का कब्जा दिया जाना था, वहां जगह आज भी खाली है।
दो दशक पहले खड़क मंगोली के 600 से ज्यादा लोग अदालत गए थे। उनकी जांच के लिए खड़क मंगोली में सर्वे कराया जा रहा है। इस दौरान अदालत में रिट दायर करने वालों की पहचान कर आधार कार्ड लिया जा रहा है। - मानव मलिक, ईओ एचएसवीपी।
खड़क मंगोली में पेयजल, सीवरेज, स्ट्रॉम का पाइप लाइन डालने के साथ-साथ सड़कों के निर्माण के लिए करीब 35 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है। मंजूरी के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है। -राजीव शर्मा, एसई एचएसवीपी।