चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित हरियाणा राज्य सूचना आयोग के कार्यालय में दूसरी मंजिल पर असिस्टेंट पद पर कार्यरत 27 वर्षीय राजप्रीत के कपड़ों को हीटर से आग लग गई। जब तक उसे पता चला आग की लपटों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया।
घटना के वक्त दूसरी मंजिल पर कोई और नहीं था। वह अकेली थीं। भागते-भागते वह पहली मंजिल पर आ गईं। आग की लपटें देखकर आयोग का चौकीदार इतना घबरा गया कि वह उसे बचाने की जगह भाग खड़ा हुआ। जान बचाने के लिए राजप्रीत आयोग की पहली मंजिल पर बने सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई के कार्यालय में घुसने की कोशिश की।
उस समय कार्यालय में आयोग के काम में लगे राज्य सूचना आयुक्त लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह के निजी सहायक गौरव शर्मा ने साथी कर्मचारी को आग में जिंदा जलते देख अपनी जान की परवाह न किए शरीर पर जलते कपड़ों को अपने हाथों से हटाया। उन्होंने आग बुझाकर उसे चादर से लपेटा। इसके बाद राजप्रीत के पति को हादसे की सूचना देकर अस्पताल पहुंचाने का प्रबंध किया।
राजप्रीत को बचाने के दौरान गौरव का कुछ शरीर और हाथ जल गए। यह घटना 31 जनवरी की है। गौरव ने राजप्रीत को अस्पताल भेजने के बाद ही खुद अपना एक निजी अस्पताल में इलाज करवाया। उनके इस साहसी कार्य से गर्भवती महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे की जान बच गई, जो अभी तक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है।
सूचना आयोग के कार्यालय के सारे कमरों में सूचना के अधिकार के मामलों की कागजों की हजारों महत्वपूर्ण फाइलें पड़ी रहती हैं। यदि गौरव शर्मा ने राजप्रीत को लगी आग को न बुझाया होता तो पूरे दफ्तर में आग लग सकती थी।
12 फरवरी को हरियाणा राज्य सूचना आयोग में गौरव शर्मा की बहादुरी और नेकदिली को देखकर उन्हें हरियाणा राज्य सूचना आयोग के चार सूचना आयुक्त भूपेंद्र कुमार धर्मानी, अरुण सांगवान, लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह और जय सिंह बिश्नोई ने बहादुरी व प्रशंसा पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया।
इस मौके पर आयोग के सूचना आयुक्त अरुण सांगवान ने अपनी ओर से 5100 की धन राशि देकर गौरव शर्मा को भविष्य में आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया।