चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मंगलवार को यूटी प्रशासन की ओर से पंजाब के चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर काम कर रहे 112 डॉक्टरों को वापस भेजने और उनकी जगह अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से डॉक्टर डेपुटेशन पर बुलाने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। शिअद ने इसे चंडीगढ़ प्रशासन में से पंजाब की हिस्सेदारी घटाने की साजिश करार देते हुए कहा है कि अकाली दल का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करके इस मामले को उठाएगा।
पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री व पार्टी प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि जब राज्य के नेता विधानसभा चुनाव में व्यस्त थे तब यूटी चंडीगढ़ के अफसरों ने यह साजिश रची कि पंजाब के 112 डॉक्टरों को वापस भेज दिया जाए और उनकी जगह हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केंद्र सरकार और अन्य केंद्र शासित राज्यों से डॉक्टर डेपुटेशन पर लेने का विज्ञापन जारी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह पंजाब पुनर्गठन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें दर्ज है कि चंडीगढ़ के लिए पंजाब और हरियाणा से कर्मचारी 60:40 अनुपात से लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब का हिस्सा घटाने की यह साजिश पहली बार नहीं रची गई। इससे पहले भी चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के तैनात अफसर ऐसी साजिश रचते रहे हैं, लेकिन तब भी अकाली दल ने इनका पुरजोर विरोध किया तो इन्हें फैसले वापस लेने पड़े थे। चीमा ने कहा कि 2018 में यह प्रस्ताव तैयार किया गया कि चंडीगढ़ के लिए 468 जेबीटी टीचर भर्ती किए जाएंगे। पंजाब पुनर्गठन एक्ट के नियमों के अनुसार पंजाब के सर्विस रूल चंडीगढ़ में लागू होते हैं, लेकिन चंडीगढ़ के अधिकारियों ने न सिर्फ पंजाबी की 10वीं तक पंजाबी अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ने की शर्त खत्म कर दी, बल्कि इन अध्यापकों के टेस्ट भी सिर्फ अंग्रेजी और हिंदी में रखे। इस तरह पंजाबी को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जब हमने यह मामला पंजाब के राज्यपाल के पास उठाया तो चंडीगढ़ प्रशासन ने संशोधित विज्ञापन जारी कर दिया। डॉ. चीमा ने कहा कि सिर्फ इतना ही नहीं चंडीगढ़ ने शिक्षा क्षेत्र में 80 फीसदी स्टाफ यूटी काडर का भर्ती कर लिया है, जबकि यह पंजाब व हरियाणा के बीच 60:40 के अनुपात में होना चाहिए था। बाकी के 20 फीसदी में से भी पंजाब को 12 फीसदी हिस्सा भी नहीं मिल रहा।