पंचकूला में कोरोना के खौफ के चलते लॉकडाउन लगाया गया है। लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। काम बंद होने के कारण तीन महीने से इन्हें वेतन नहीं मिला है। इस कारण अब इनके पास घर जाने के पैसे नहीं बचे हैं। प्रशासन से गुहार लगाए जाने के बाद भी इन्हें घर नहीं भेजा गया है। अमर उजाला टीम की ओर से सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में मजदूरों के भेजे जाने के दावे के दौरान यह दर्द सामने आया है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार जाने वाले मजदूर पैसा नहीं होने के कारण अभी तक घर नहीं पहुंच पाए। प्रवासी मजदूरों की जुबानी उनका दर्द यह रहा-
कोठी मालिक देता है केवल खाना
मैं सेक्टर 16 में रहता हूं। वहां की कोठी में काम करता हूं। काम करने के बाद भी तीन महीने से तनख्वाह नहीं दी गई। तनख्वाह नहीं मिलने के कारण मेरे पास घर जाने के भी पैसे नहीं हैं। जहां कोठी में मैं काम करता हूं वहां मालिक से पैसे मांगे, लेकिन पैसे नहीं दिए गए। इस कारण मैं अपने घर नहीं जा सका। काम करने के बदले कोठी मालिक केवल खाना दे रहे हैं। अभी तक उन्होंने हमें पैसे नहीं दिए गए हैं। सेक्टर 6 सिविल अस्पताल में हम मेडिकल करवाने आए हैं। मेडिकल करवाने के बाद भी हमारे पास पैसे नहीं हैं इसलिए हम अपने घर नहीं जा पाए हैं। प्रशासन को भी इस बारे में अवगत कराया है। इसके बाद भी हमारी कोई सुनवाई नहीं हो पाई है।
- अर्जुन कुमार, प्रवासी मजदूर, रीवा, मध्यप्रदेश
घर जाने का किराया नहीं
मैं केबल डालने का काम करता हूं। लॉकडाउन के कारण तीन महीने से काम बंद है। सैलरी भी नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेन और बस से जब घर जाने की मुझे जानकारी मिली तो मैंने अपने ठेकेदार से घर जाने के लिए पैसे मांगे। उन्होंने तीन महीने में मेरी तनख्वाह नहीं दी। तनख्वाह नहीं दिए जाने के कारण बुढ़नपुर में मकान का किराया भी नहीं दे पाया। खाने के भी पैसे नहीं हैं। सफर के लिए पैसे नहीं होने के कारण मैं घर नहीं जा सका। - अरुण कुमार, निवासी हरदोई, यूपी
मेडिकल होने के बाद भी बस में नहीं चढ़ने दिया गया
मेडिकल होने के बाद भी मुझे आज बस से उतार दिया गया। इसके लिए मैंने बस स्टैंड पर गुहार भी लगाई फिर भी मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। मैं घर नहीं जा सका। मेरे पास पैसे नहीं हैं। प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। कोठी में काम करने के बाद भी सैलरी नहीं मिली।
- राजेश प्रजापति, निवासी रीवा, मध्यप्रदेश
खाने के पैसे नहीं, घर कैसे जाएं
मेरे पास चार दिन से खाने के पैसे नहीं है। मैं घर कैसे पहुंचुंगा, यह मुझे नहीं पता। प्रशासन की ओर से मदद के दावे झूठे हैं। मैं केबल के ठेकेदार के साथ काम करता था। ठेकेदार ने मुझे तीन महीने से सैलरी नहीं दी गई, केवल आश्वासन दिया गया। अब मैं अपने घर नहीं पहुंच पा रहा हूं। इससे मुझे परेशानी हो रही है। मेडिकल बनवाने के बाद भी मेरे पास घर जाने के पैसे नहीं हैं। प्रशासन से गुहार लगाई है कि घर पहुंचाया जाए।
- मुन्ना कुमार, केबल ऑपरेटर, निवासी पटना
मकान मालिक ने घर से निकाला, जाने के पैसे नहीं
मैं कंस्ट्रक्शन वर्कर के पास मजदूरी का काम करता था। 3 महीने से काम बंद होने के कारण पैसे खत्म हो गए। इस कारण मैं मकान का किराया भी नहीं दे पाया। मकान मालिक ने मुझे घर से निकाल दिया। मेरे पास खाने और घर जाने के भी पैसे नहीं हैं। मेडिकल तो अस्पताल में आकर करवा लिया है। घर कब पहुंचेंगे, इसका पता नहीं है। हमें प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। इस कारण हम अभी तक पंचकूला में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
- संजीत कुमार निवासी पटना, बिहार