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Panchkula News: न परिवार को उचित सिक्योरिटी मिल रही है और न ही बेटे को सरकारी नौकरी

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चंडीगढ़। आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ने वाले भिंखीविंड निवासी शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह संधू की हत्या के तीन साल बाद भी परिवार को सुरक्षा से लेकर अन्य सभी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। परिवार को न तो शहीदों के परिवार की तरह सुविधाएं मिल रही हैं और न ही बेटे को सरकारी नौकरी मिली है। यह आरोप वीरवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में कामरेड बलविंदर सिंह की पत्नी जगदीश कौर संधू ने वीरवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में डीजीपी व सीएम को पत्र भी लिखा है लेकिन उनसे मुलाकात का समय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अपनी आवाज सीएम तक पहुंचाने के लिए यह राह चुनी है।जगदीश कौर ने बताया कि पुलिस की तरफ से उन्हें चार सुरक्षा गार्ड नाम के लिए दिए गए हैं। इनमें से एक-दो तो अकसर छुट्टी पर रहते हैं। इसके अलावा उनके पास अति आधुनिक हथियार नहीं हैं। सुरक्षा मुलाजिमों को कार्बाइन दे रखी है जिससे परिवार की सुरक्षा करना कठिन है। उनके बेटे ने इंजीनियरिंग की मास्टर डिग्री की गई। जब बलविंदर सिंह संधू की हत्या हुई थी उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली सरकार ने ए क्लास नौकरी देने का एलान किया था लेकिन अभी तक वादा पूरा नहीं हुआ है। शहीदों के परिवारों की तर्ज पर उन्हें सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि परिवार को वित्तीय सुविधाएं दी जाएं। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भिखीविंड का नाम उनके शहीद पति के नाम पर रखा जाए।
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ऐसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ी थी जंग
जगदीश कौर ने बताया कि 90 के दशक में पंजाब में आतंक चरम था। इस दौरान उनके पूरे परिवार ने देश की एकता और अखंडता के लिए आतंकवादियों के 40 हमलों का सामना किया। इन हमलों में आतंकियों की संख्या 100 से अधिक रही। इसके चलते तत्कालीन देश के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा बलविंर सिंह को वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया लेकिन सरकारों की उदासीनता के कारण उनके परिवार के मुखिया बलविंदर सिंह संधू को अपनी जान गंवानी पड़ी। इससे भी दुखद बात यह है कि देश के शहीदों के प्रति सरकार की उपेक्षा करना। आतंकवाद के खिलाफ लड़ी गई यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं बल्कि देश की एकता और अखंडता की लड़ाई थी। अगर वे नहीं लड़ते तो शायद भारत और पंजाब की स्थिति कुछ और होती।
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