चंडीगढ़। दुनिया भर में रहने वाले सिखों को पेश आती चुनौतियों और समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग हर संभव प्रयास कर रहा है। यह बात राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने आयोग और ग्लोबल पंजाबी एसोसिएशन की ओर से आयोजित संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कही। बैठक में शिक्षाविदों, पूर्व सैनिकों, वकीलों, अभिनेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न क्षेत्रों की 50 से अधिक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। इस बैठक का संचालन ग्लोबल पंजाबी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कर्नल जयबंस सिंह और एसोसिएशन के मानद सचिव डॉ. जसविंदर सिंह ढिल्लों ने किया। अपने शुरुआती भाषण में इकबाल सिंह लालपुरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में अल्पसंख्यक आयोग के 15 सूत्री कार्यक्रम के तहत सिखों सहित अल्पसंख्यक समुदायों के लिए केंद्र सरकार द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी। 15 सूत्री कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 225 कार्यक्रमों में शीर्ष पर है, जिसे सरकार ने 2014 से शुरू किया है।
लालपुरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में पंजाब और सिख समुदाय के लिए विशेष स्थान है, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक और सामाजिक स्तर पर कई सकारात्मक सिख-केंद्रित पहल हुई हैं।
इस अवसर पर प्रमुख हस्तियों ने पंजाब के युवाओं की शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और उन्हें आधुनिक दुनिया में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने पर जोर दिया।
शिरोमणि कमेटी चुनाव में सहजधारी सिखों को वोट देने के अधिकार पर जोर :
जीवन स्तर को बनाए रखने और एसजीपीसी को आधुनिक जरूरतों के अनुकूल बनाने के लिए इसमें सुधार करने की जोरदार मांग की गई। शिरोमणि कमेटी चुनाव में सहजधारी सिखों को वोट देने के अधिकार में शामिल करने पर जोर दिया गया। धार्मिक प्रचार पर भी अधिक ध्यान देने पर बल दिया गया। इस अवसर पर यह विचार किया गया कि कला और संस्कृति सिख धर्म के विकास में प्रमुख भूमिका निभा सकती है, इसलिए पंजाबी भाषा के विकास पर विशेष जोर देते हुए हमारी परंपराओं और संस्कृति को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। बैठक में सर्वसम्मति से कहा गया कि सिख समुदाय को सकारात्मकता और आधुनिकता दिखानी चाहिए और आत्मनिर्भरता के लिए प्रयास करना चाहिए।