चंडीगढ़। पंजाब में पराली की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने इसके प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाले प्रोपेल्ड बेलरों के निर्माण को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। बाकायदा पंजाब की नई औद्योगिक नीति में इसके लिए खास प्रावधान किया गया है। सरकार मौजूदा कृषि बेलरों को पराली आधारित प्रोपेल्ड बेलरों में बदलेगी। इन मशीनों को बदलने के लिए उद्योगों को सरकार की ओर से 75 फीसदी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत पहली 50 यूनिटों को राज्य के हिस्से के जीएसटी से रियायत दी जाएगी। इसके अलावा धान की स्टोरेज की खरीद के लिए स्टैंप ड्यूटी की छूट प्रदान की गई है। गौर हो कि केंद्र सरकार ने अपनी सीआरएम (फसल अवशेष प्रबंधन) योजना के तहत पंजाब सरकार, एनसीआर राज्य सरकारों और जीएनसीटीडी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) को 2018-19 से 2022-23 की पांच साल की अवधि के दौरान इस क्षेत्र में पराली के प्रभावी प्रबंधन के लिए 3,062 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की है। इसमें से 1,426 करोड़ रुपये से अधिक पंजाब राज्य सरकार को जारी किए गए हैं। पंजाब सरकार ने अब पराली के प्रबंधन को लेकर अपनी नई औद्योगिक नीति में नए प्रावधान रखे हैं, जिसका सीधा लाभ उद्योगों को मिलेगा।
पंजाब में 24,200 कस्टम हायरिंग सेंटर
अब तक सीआरएम योजना के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पंजाब में लगभग 1.20 लाख, हरियाणा में लगभग 72,700 और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में लगभग 7,480 मशीनें उपलब्ध हैं। इस अवधि के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लगभग 38,400 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित किए गए हैं। इनमें पंजाब में लगभग 24,200 और हरियाणा में लगभग 6,775 सीएचसी हैं।