चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि कमाने योग्य बच्चों की स्वस्थ और शिक्षित मां अपने पति से गुजारा भत्ता की राशि को बढ़ाने का दावा नहीं कर सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरदासपुर की फैमिली कोर्ट की ओर से लगाए गए 7500 रुपये के गुजारा भत्ता आदेश के खिलाफ पत्नी की अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।
महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उसका विवाह जनवरी 1991 में हुआ था। इस विवाह से उसकी तीन संतान थीं। वैवाहिक मतभेदों के कारण दंपती दिसंबर 2008 से अलग रह रहे थे। याची की बेटी का विवाह 2016 में हुआ था। याची ने बताया कि उसको गुजारा भत्ता के रूप में गुरदासपुर की अदालत ने प्रतिमाह 7500 रुपये तय किए थे जो गलत है। याची का पति कम से कम 90,000 रुपये प्रति माह कमा रहा था।
हाईकोर्ट ने पाया कि याची का पति सशस्त्र बलों में कार्यरत था। गुजारा भत्ते को लेकर याचिका जनवरी 2019 में दायर की गई थी। महिला के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि वह 2008 से 2019 तक अपना भरण-पोषण कैसे कर रही थी। याची के पति ने बताया कि रिटायर्ड होने के बाद उसकी मासिक आय 30,000 रुपये है, जिसमें से वह 15,000 रुपये ऋण किस्त के रूप में देता है। इसके अतिरिक्त वह अपनी वृद्ध मां को 5,000 रुपये देता है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि महिला के दो बेटे वयस्क हो चुके हैं और याची उनके साथ रह रही हैं। कमा रहे बेटे अपने साथ रह रहीं मां का सहयोग न करते हों यह माना नहीं जा सकता। ऐसी स्थिति में गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग वाली याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया।