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Panchkula News: हर माह 10 लाख से ज्यादा हो रहे खर्च फिर भी झुग्गियां नहीं रहीं हट

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आदेश चौधरीपंचकूला। शहर से झुग्गियां हटाने का काम केवल कागजों में ही चल रहा है। हर माह कर्मचारियों के वेतन और जेसीबी के किराये के रूप में एचएसवीपी इस पर 10 लाख से ज्यादा खर्च कर रहा है, मगर परिणाम ढाक के तीन पात है। ऐसे में विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का स्लम फ्री पंचकूला का सरोकार पूरा होता नजर नहीं आ रहा। एचएसवीपी अपनी इस नाकामी को पुलिस विभाग पर थोप रहा है, वहीं पुलिस इस मामले से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है। संवाद
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विधानसभा अध्यक्ष ने सात सरोकार शुरू किए थे। इनमें एक स्लम फ्री पंचकूला है। इन सरोकारों को सिरे चढ़ाने के लिए हर माह बैठक की जाती है। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाती है। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट तो दिखाई जाती है, मगर धरातल की स्थिति के बारे में उनको नहीं बताया जाता। सिर्फ कागजों में हो रही कार्रवाई पर अधिकारी अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। शहर के सेक्टर-4, 5, 14 और एमडीसी सेक्टर-6 में बनी झुग्गियों को हटाने के लिए हर दो-चार दिन बार कार्रवाई की जाती है। मगर झुग्गियां ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। अगर फरवरी की बात करें तो एचएसवीपी की अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने 28 दिन में 39 कार्रवाई विभिन्न सेक्टरों में झुग्गियां को हटाने के लिए की और 766 झुग्गियों को हटाया। मगर उनमें से कोई भी सेक्टर स्लम फ्री अभी तक नहीं हो सका है। अतिक्रमण हटाओ दस्ते में अनुबंध पर 60 कर्मचारी हैं। इनको हर माह 15 हजार रुपये के हिसाब से नौ लाख रुपये वेतन दिया जाता है। इनके अलावा अधिकारियों के वेतन और सरकारी गाड़ियों का खर्च अलग है।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
एचएसवीपी की टीम झुग्गियां हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। न झुग्गियों का पूरा सामान उठाया जाता है और न ही कोई उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है। टीम के वहां से जाते ही फिर से लोग अपनी झुग्गियां लगा लेते हैं। एचएसवीपी का कहना है कि जगह को खाली कराने के बाद पुलिस को वहां की जिम्मेवारी सौंपी जाती है। मगर इसके बावजूद फिर से झुग्गियां लग जा रही हैं।
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जेसीबी का भी बनता है भारी-भरकम बिल
जहां भी झुग्गियां हटाई जाती हैं, वहां जेसीबी से भी जगह को समतल कर दिया जाता है। अलग-अलग सेक्टरों में कार्रवाई के दौरान कम से कम 7 से 8 घंटे तक जेसीबी का प्रयोग किया जाता है। 700 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से यह बिल भी भारी भरकम बनता है। फरवरी में 23 दिन झुग्गियां हटाने का अभियान चलाया गया। अगर इस दौरान 200 घंटे भी जेसीबी चली तो 1.40 लाख का बिल बनता है।

फरवरी में सेक्टरों से हटाई गईं झुग्गियां
दिन सेक्टर-4 सेक्टर-5 सेक्टर-6 एमडीसी सेक्टर-14
1 फरवरी 16
2 फरवरी 16
3 फरवरी 42
4 फरवरी
5 फरवरी
6 फरवरी 35
7 फरवरी 32
8 फरवरी
9 फरवरी 32
10 फरवरी 15 10 28
11 फरवरी 25 30
12 फरवरी
13 फरवरी 16 27
14 फरवरी 22 26
15 फरवरी 19
16 फरवरी
17 फरवरी 20
18 फरवरी 14 27
19 फरवरी 12 23
20 फरवरी 46
21 फरवरी 12 22
22 फरवरी 38
23 फरवरी 28
24 फरवरी 12 25
25 फरवरी 15 18
26 फरवरी
27 फरवरी 16 22
28 फरवरी 16 09
कुल 74 73 265 354

शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अब नया तरीका यह अपनाया जा रहा है चिक जगह को खाली कराने के बाद वहां की जिम्मेवारी पुलिस को सौंप दी जाती है। एसएचओ को मौके पर बुलाकर उन्हें जगह हैंडओवर की जाती है। उसके बाद जिम्मेवारी पुलिस विभाग की है। अगर जरूरत पड़ती है तो एचएसवीपी की टीम मदद करने के लिए पहुंच सकती है। मानव मलिक, ईओ, एचएसवीपी

पुलिस विभाग की ओर से एचएसवीपी को पूरा सहयोग दिया जाता है। जहां भी झुग्गियां हटाई जाती हैं, वहां संबंधित एचएचओ को हिदायत दी जाती है कि दोबारा झुग्गियां न लगें। पुलिस विभाग की ओर से भी इस मामले में जरूरी कार्रवाई की जाती है।- सुमेर प्रताप सिंह, डीसीपी, पंचकूला
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