चंडीगढ़। एनडीपीएस केस में फंसे अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मजीठिया बीते एक माह से न्यायिक हिरासत में पटियाला जेल में बंद हैं। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 1 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है।
सु्प्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मजीठिया ने एफआईआर रद्द करने की मांग के साथ ही यह मांग भी की है कि इस मामले की जांच से एसआईटी प्रमुख हरप्रीत सिद्धू को अलग रखा जाए, क्योंकि वह अपने सियासी आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने याचिका में शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि उनके खिलाफ जो भी एसआईटी जांच करे, वह सीधे हाईकोर्ट की निगरानी में की जाए और हाईकोर्ट के निर्देश पर ही उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाए।
उल्लेखनीय है कि मजीठिया के खिलाफ गत 20 दिसंबर को मोहाली में एनडीपीएस की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। मजीठिया ने इस मामले में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर मोहाली की ट्रायल कोर्ट में अर्जी दायर की, जिसके खारिज हो जाने पर उन्होंने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी। उनकी यह याचिका भी खारिज हो गई। बाद में मजीठिया अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट गए, जहां उन्हें जमानत तो नहीं मिली लेकिन शीर्ष कोर्ट ने कुछ राहत देते हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के मतदान तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इसके साथ ही कोर्ट ने मजीठिया को निर्देश दिए थे कि वह मतदान के बाद आत्मसमर्पण कर दें।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मजीठिया ने मोहाली की ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया और साथ ही नियमित जमानत की याचिका भी दायर कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उसी दिन उनकी नियमित जमानत की मांग को खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 25 फरवरी से मजीठिया इस केस में न्यायिक हिरासत में हैं।