चंडीगढ़। पंजाब वन विभाग पौधरोपण अभियान के लिए अब सूबे की सरकारी नर्सरियों से पौधों की खरीद करेगा। पौधरोपण अभियान में पौधों की खरीद में हुई घपलेबाजी उजागर होने के बाद विभाग ने यह फैसला किया है। वन विभाग के एक भ्रष्टाचार के मामले में विजिलेंस जांच में यह गड़बड़ी उजागर हुई है।
पंजाब विजिलेंस इन दिनों पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में जांच कर रही है। पंजाब विजिलेंस को वन विभाग में पूर्व मंत्री द्वारा कई मामलों में रिश्वत लिए जाने के सबूत मिले थे, जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। जांच जारी रखी थी। इसके बाद पूर्व वन मंत्री संगत सिंह गिलजियां के खिलाफ भी पेड़ों के अवैध कटान के मामले में लिए जाने वाली रिश्वत के सबूत मिलने पर उनके खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की हुई है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि पौधरोपण अभियान के दौरान पौधों की खरीद में भी घपला किया गया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि विभागीय ठेकेदार बिना कोई पौधे खरीदे 20 प्रतिशत राशि देकर निजी नर्सरी राशि का 80 प्रतिशत नकद में वापस ले लेते थे। यह 80 प्रतिशत राशि अधिकारियों, राजनेताओं और ठेकेदार के बीच साझा की जाती थी। इस खुलासे से सबक लेते हुए वन विभाग प्रत्येक वर्ष चलाए जाने वाले पौधरोपण अभियान के तहत खरीदे जाने वाले पौधे अब निजी नर्सरी से नहीं खरीदेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले से पौध खरीद मामले में पारदर्शिता आएगी।
एनएचएआई योजना के तहत होनी थी खरीद
2021-22 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की एक पौधरोपण परियोजना के तहत निजी नर्सरी से करीब एक लाख पौधों की खरीद हुई थी। इसमें निर्गत राशि के मात्र 20 फीसदी पैसे से ही रोपित किए जाने वाले पौधों की खरीद की गई।