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Panchkula News: संगीत और नृत्य के साथ पेश कीं भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं

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पंचकूला। सेक्टर-7 श्री दुर्गा माता मंदिर में जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही श्री भागवत कथा में यमुनापुरी जी महाराज भक्तों को श्री कृष्ण की लीलाएं सुना रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन और उनकी लीलाएं भारतीय नृत्य और संगीत के कई रूपों में दर्शाई जाती हैं। कृष्ण जन्माष्टमी को जन्माष्टमी और गोकुलाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है और यह एक वार्षिक हिंदू त्योहार है जो विष्णुजी के दशावतारों में से 8वें और 24 अवतारों में से 22वें अवतार श्रीकृष्ण के जन्म के आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी, भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन की खुशी में मनाया जाने वाला एक बड़ा हिंदू त्योहार है। यह त्योहार भाद्रपद के महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए बहुत खास होता है। इसी दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। यमुनापुरी जी महाराज ने कहा कि श्री कृष्ण का नाम जन्म भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। उनके माता-पिता देवकी और वासुदेव थे। मथुरा, जहां कृष्ण जी का जन्म हुआ था। भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण जगह रखता है। जन्माष्टमी पर लोग पूजा-पाठ करते हैं और कृष्ण जी की बचपन की कहानियां सुनते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सभी के घरों में भगवान कृष्ण की सुंदर मूर्तियां सजाई जाती हैं। बच्चे कृष्ण और राधा बनते हैं। धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। वृंदावन और मथुरा में तो बहुत ही धूम-धाम से यह त्योहार मनाया जाता है। जन्माष्टमी की रात को जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय खास पूजा और आरती होती है। भजन-कीर्तन होते हैं। भक्त लोग उपवास रखते हैं और रात भर जागते हैं। मंदिरों में रासलीला, झूला और भजन संध्या करना चाहिए।
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