पंचकूला। हरियाणा ने कई ओलंपिक और एशियाई खेल पदक विजेताओं को जन्म दिया है। इस बार हरियाणा घरेलू मैदान में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का मेजबान बनकर शीर्ष पर काबिज होने की तैयारी में है। वर्ष 2018 में पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में पदक तालिका में पहले नंबर पर खिताब दर्ज किया था, लेकिन 2019 में पुणे महाराष्ट्र ने अपनी घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर मेजबान ने दूसरे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में अपनी बादशाहत कायम कर ली। इन खेलों में महाराष्ट्र ने 85 स्वर्ण पदक और हरियाणा ने 62 स्वर्ण पदक जीते। इतना ही नहीं महाराष्ट्र ने अपने वर्चस्व को 2020 में भी बरकरार रखकर असम के गुवाहाटी में आयोजित गेम्स में 78 स्वर्ण पदक के साथ शीर्ष पर काबिज हुआ। हरियाणा को 68 स्वर्ण के साथ संतोष करना पड़ा था। इस बार हरियाणा के पास बेहतर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और खिलाड़ी भी हैं। एक ओर जहां हरियाणा एकल स्पर्धाओं जैसे कुश्ती, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स में पदकों के लिए जोर आजमाइश को तैयार है। वहीं महाराष्ट्र तैराकी, शूटिंग, जिमनास्टिक्स और वेटलिफ्टिंग में पदकों की दौड़ में है। इस बार हरियाणा ने सबसे बड़े दल के रूप 396 खिलाड़ियों का मैदान में उतारा है, वहीं 318 खिलाड़ी महाराष्ट्र के मैदान में हैं। जिनमें वे 25 में 23 प्रतिस्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं।