पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी कर्मचारी की सेवा को पिछली तिथि से समाप्त करके उसके सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के ड्राइवर की 25 साल से लंबित याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट तिथि और आदेश जारी करने की तिथि के बीच के सभी लाभ जारी करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए बहादुर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि वह 1970 में सेवा में शामिल हुआ था तथा उसकी सेवा पुस्तिका में जन्म तिथि 20 जुलाई, 1938 दर्ज थी। याची को 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर 31 जुलाई, 1996 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन 8 जून, 1995 को आदेश जारी कर 31 दिसंबर, 1994 से रिटायर कर दिया गया।
विभाग का तर्क था कि याची की जन्मतिथि कुछ कागजात के मुताबिक दिसंबर 1936 थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि नियोक्ता-कर्मचारी संबंध समाप्त करने का आदेश तत्काल प्रभाव से या भविष्य की तिथि (बाद में प्रभावी) से प्रभावी हो सकती है। संबंध समाप्ति का आदेश पिछली तिथि से लागू करना कर्मचारी को सेवा के दौरान अर्जित लाभों से वंचित करने जैसा होगा। कर्मचारी के अधिकारों और उनकी सेवा के दौरान अर्जित लाभों की रक्षा की जानी चाहिए।
सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला वर्ष 1999 से संबंधित है और इसे सुनवाई के लिए 2001 में स्वीकार किया गया था और ऐसे में इसका जल्द निपटारा जरूरी है। हाईकोर्ट ने याची को 31 दिसंबर, 1994 से रिटायर करने के आदेश को रद्द कर दिया है और उसे रिटायर करने का आदेश जारी करने की तिथि 8 जून, 1995 से रिटायर मानने का आदेश दिया है। ऐसे में अब बीच की अवधि के सभी लाभ जारी करने का पंजाब सरकार को निर्देश दिया है।