चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सरकार और वित्त मंत्री इन दिनों तैयारी में जुटे हैं, लेकिन दूसरी तरफ विपक्षी दल, राज्य के किसान संगठन और कर्मचारी संगठनों ने भी तैयारी कर ली है। 1 से 15 मार्च तक चलने वाले इस विधानसभा सत्र के पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में विपक्ष द्वारा किसानों पर पुलिस हिंसा का मुद्दा उठाया जा रहा है, जिसमें आप सरकार निशाने पर रहेगी।
कांग्रेस और अकाली दल पहले ही मुख्यमंत्री पर इस आधार पर केंद्र से साठगांठ का आरोप लगा चुके हैं कि उन्होंने हरियाणा पुलिस द्वारा पंजाब के किसानों पर किए गए हमलों को न तो रोका और न ही उनका विरोध किया। यह मामला इस विधानसभा सत्र में लगातार गूंजने के आसार हैं। इसके साथ ही पंजाब के सरकारी मुलाजिमों की लंबित मांगें, जिनमें छठे वेतन आयोग की सिफारिशें, कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने, बकाया डीए के भुगतान और पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख हैं, को लेकर भी विपक्ष द्वारा सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
दूसरी ओर, विधानसभा के बाहर भी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली गई है। सरकारी मुलाजिमों के विभिन्न संगठनों का साझा मोर्चा 4 मार्च को और अगले दिन 5 मार्च को अध्यापक संगठन व पुरानी पेंशन बहाली की मांग से जुड़े संगठन विधानसभा की तरफ रोष मार्च का एलान कर चुके हैं। इसके लिए मुलाजिम संगठन मोहाली और चंडीगढ़ में ही एकजुट होंगे और विधानसभा की तरफ कूच करेंगे। इस दौरान, सदन में विपक्ष द्वारा मुलाजिमों की मांगों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी की गई है।
उधर, सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार सत्र के पहले दिन वह दिवंगत शख्सियतें जिन्हें सदन में श्रद्धांजलि दी जानी हैं, की सूची में किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के नाम शामिल करने के अलावा हरियाणा पुलिस द्वारा किसानों पर की गई बर्बर कार्रवाई के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है। हालांकि विपक्ष पहले ही सरकार पर हरियाणा पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ा है और यह मांग सदन में भी हंगामे का कारण बनने वाली है।