खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा का इंडिया हेड बन चुके गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंदा की मौत के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की पंजाब में अशांति फैलाने की मुहिम को झटका लगा है। लाहौर में दो माह पहले आईएसआई की एक गुप्त बैठक में खालिस्तान मुहिम के लिए पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका और यूरोप में छिपे आतंकियों के साथ फंडिंग के बारे में फैसले लिए गए थे। भारतीय खुफिया एजेंसियां उसी समय से उन चेहरों की तलाश में जुटी हैं, जिनके जरिये पैसा इकट्ठा करके आईएसआई पंजाब में खालिस्तान समर्थकों और गैंगस्टरों को फंडिंग कर रही है।
आईएसआई के इशारे पर ही आतंकी वधावा सिंह ने रिंदा को खालिस्तानी मुहिम से जोड़ते हुए उसे इंडिया हेड बना दिया था। हालांकि वधावा सिंह ने उसे धर्म से जुड़े मामले से नहीं जोड़ा, बल्कि पंजाब में टारगेट किलिंग में शामिल गैंगस्टरों और पाकिस्तान से नशे की तस्करी करने वाले अपराधियों को अपने साथ जोड़ने का काम सौंपा था, ताकि पैसे की व्यवस्था भी हो सके और पंजाब में अपने टारगेट पर हमले कराए जा सकें। रिंदा के पंजाब में कुख्यात गैंगस्टरों से संबंध हाल ही में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जांच के दौरान उजागर हुए थे। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के अलावा कनाडा में छिपे गोल्डी बराड़ और लंडा से भी रिंदा की करीबी थी और यह गैंग किसी भी वारदात में एक-दूसरे का सहयोग करते रहे हैं।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पंजाब में 2020 से अब तक 100 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें आईएसआई की फंडिंग और इशारे पर पंजाब में नशे और हथियारों की खेप भेजी गई हैं। यह खेप किन लोगों तक पहुंचाई जानी है, उसकी व्यवस्था रिंदा और अन्य आतंकियों द्वारा की जाती थी। वहीं, आईएसआई इन खेपों के लिए फंड का प्रबंध कनाडा, जर्मनी, इटली और अन्य यूरोपीय देशों में बैठे खालिस्तान समर्थकों से करता है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पंजाब से सटी सीमा पर पाकिस्तानी रेंजर्स और आईएसआई ने 6 जगह ड्रोन सेंटर बनाए हैं, जहां से पंजाब में इस साल ड्रोनों की घुसपैठ के 170 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।