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पर्यटन को बढ़ावा: ढोसी हिल्स में बनेगा हरियाणा का पहला रोप-वे, आयुर्वेद रिजॉर्ट की भी तैयारी

Sun, 21 Aug 2022 02:24 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रोप-वे की डीपीआर अभी बननी है, केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट मंजूर होने का इंतजार है। ढोसी की पहाड़ियों में सम्राट हेमू की किलेबंदी अभी बची हुई है। मुगलकाल से पहले यहां गुरुकुल, वेद और आयुर्वेद परंपरा रही है। उसे नया स्वरूप दिया जाएगा। 
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मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नारनौल जिले की ढोसी हिल्स में हरियाणा का पहला रोप-वे बनेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय कंपनी बनाएगी। रोप-वे की लंबाई 1200 मीटर और समुद्र तल से ऊंचाई 100 मीटर होगी। प्रदेश सरकार ने इसे राष्ट्रीय कंपनियों से न बनाने का निर्णय लिया है। हिल्स में आयुर्वेद रिजॉर्ट बनाने के साथ ही सम्राट हेमू के किले को भी संरक्षित किया जाएगा।

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सरकार ने केंद्र सरकार को ढोसी की विकास परियोजना भेजी हुई है, जिसके अक्तूबर अंत तक स्वीकृत होने की उम्मीद है। केंद्रीय पर्यटन सचिव के साथ इस महीने की शुरुआत में हरियाणा पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा की बैठक हो चुकी है। उन्होंने पूरी परियोजना पर चर्चा की है। सिन्हा ने बताया कि रोप-वे की डीपीआर अभी बननी है, केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट मंजूर होने का इंतजार है। बीते दिनों हुई बैठक सकारात्मक रही है। ढोसी की पहाड़ियों में सम्राट हेमू की किलेबंदी अभी बची हुई है। मुगलकाल से पहले यहां गुरुकुल, वेद और आयुर्वेद परंपरा रही है। उसे नया स्वरूप दिया जाएगा। 

प्रधान सचिव ने बताया कि च्यवन ऋषि की तपो भूमि होने के कारण यहां उनका आश्रम था, उसका जीर्णोद्वार करेंगे। पैराग्लाइडिंग और पैराजंपिंग शुरू करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद पहाड़ियों का भ्रमण करने के बाद पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा कर चुके हैं। प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे, इसलिए प्रदेश सरकार केंद्र के साथ मिलकर इसे सिरे चढ़ाना चाहती है।

ढोसी हिल्स की अनेक विशेषताएं : सिन्हा

एमडी सिन्हा के अनुसार इसी पहाड़ी की जड़ी-बूटियों से पहली बार च्यवनप्राश बना। शंखपुष्पी और कायाकल्प नामक औषधि का भी रहस्य यहां छिपा है। इसे आग्नेयगिरी भी कहते हैं। पांडव भी अज्ञातवास के दौरान यहां आए थे। महाभारत और पुराणों में भी यहां का जिक्र है। ढोसी हिल्स की उत्पत्ति त्रेता युग में हुई, यहां मौजूद कुंड में स्नान का विशेष महत्व है।
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