चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए खुद को श्री गुरु नानक देव जी का अवतार व सिखों का 12वां गुरु होने का दावा करने के आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी है। इस बारे में धार्मिक व कानूनी पहलुओं पर सहयोग के लिए हाईकोर्ट ने कोर्ट मित्र नियुक्त करने का निर्णय भी लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए संजय राय ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके खिलाफ 23 दिसंबर 2022 को सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप के अनुसार याची ने खुद को सिखों का 12वां गुरु करार दिया था और दावा किया था कि उसके भीतर गुरु नानक देव की आत्मा का निवास है। इसको लेकर एक वीडियो वायरल हुई थी जो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास पहुंची थी। इस वीडियो को आधार बनाकर एसजीपीसी ने पुलिस को शिकायत दी थी।
पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद अमृतसर में एफआईआर दर्ज की थी। याचिकाकर्ता ने इसी मामले में अग्रिम जमानत देने की हाईकोर्ट से मांग की थी। याचिका का विरोध करते हुए एसजीपीसी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने संतलोक आश्रम में प्रचार के दौरान यह दावे किए थे जो सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। इसके साथ ही इन दावों के माध्यम से याची पाखंड को बढ़ावा देने व गरीबों को लूटने का काम कर रहा है। इसके साथ ही यह भी कहा कि हुकुमनामे के अनुसार केवल गुरुग्रंथ साहिब को ही पूर्ण गुरु के रूप में सिखों द्वारा पूजा जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया एफआईआर की विषय वस्तु धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों का समर्थन नहीं करती। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हुए जांच में शामिल होने का आदेश दिया है। धार्मिक भावनाएं आहत होने व सिखों के हुकुमनामे की कानूनी वैधता को लेकर जांच के लिए हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट अतुल लखनपाल व बलजिंदर सिंह को कोर्ट सहयोगी नियुक्त किया है।