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नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में क्या 24 घंटे में सीडब्ल्यूसी को सौंपी जा रही रिपोर्ट: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में पुलिस पॉक्सो एक्ट के प्रावधान के तहत क्या नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति और सत्र न्यायालय को सूचना दे रही है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में पिछले एक साल में दर्ज सभी मामलों का आंकड़ा तलब कर लिया है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी डॉक्टर ने एफआईआर रद्द करने की मांग थी थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में 2 दिसंबर, 2023 को उसके गर्भवती होने की सूचना दी गई थी और महिला जांच अधिकारी ने 21 दिसंबर, 2023 तक सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज नहीं कराए थे। याचिकाकर्ता डॉक्टर पर नाबालिग का जबरन गर्भपात कराने का मामला दर्ज किया गया था।
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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज किए गए पीड़िता के बयान के आधार पर उन्हें फंसाया जा रहा है और पीड़िता ने अपने दूसरे बयान में पहले को नकार दिया था। उन्होंने कहा कि जब नाबालिग पीड़िता याचिकाकर्ता के क्लिनिक में गई थी, तो याचिकाकर्ताओं के पास यह संदेह करने का कोई कारण नहीं था कि वह गर्भवती है। पीड़िता 14 वर्ष की थी और उसने केवल पेट दर्द की शिकायत की थी। याची ने उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी थी। अचानक याची के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
याची ने कहा कि पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी पर पुलिस को उसका बयान दर्ज करवाना चाहिए था और गर्भपात के अधिकार की जानकारी देनी चाहिए थी। दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर नोटिस जारी किया।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने किशोरों की निजता के अधिकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि पुलिस का कर्तव्य है कि नाबालिग पर अपराध के बारे में जानकारी मिलने के 24 घंटे के भीतर मामले की सूचना सीडब्ल्यूसी और विशेष अदालत को दे। ऐसे में अब हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिवों से अनुरोध है कि वे संबंधित जिलों से जानकारी एकत्र करें कि क्या पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का अनुपालन किया जा रहा है। उन्हें इस संबंध में बीते एक वर्ष का आंकड़ा पेश करने का आदेश दिया है।
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