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Panchkula News: आईजी परमराज उमरानंगल को निलंबन अवधि का वेतन जारी नहीं, पंजाब सरकार को फटकार

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चंडीगढ़। आईजी परमराज उमरानंगल को जॉइन करवाने के बावजूद निलंबन अवधि के वेतन का बकाया जारी न करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब निलंबन का आदेश हाईकोर्ट रद्द कर चुका है और सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है तो वेतन का बकाया जारी न करना न्यायालय की अवमानना जैसा है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक या तो लंबित राशि जारी करने या फिर अवमानना की कार्रवाई के लिए गृह सचिव को मौजूद रहने का आदेश दिया है। कोटकपूरा गोलीकांड में निलंबित आईजी परमराज उमरानंगल ने याचिका दाखिल करते हुए सेवा नियमों का हवाला देते हुए निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। इसके साथ ही सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के आदेश को भी रद्द करने की मांग की थी जिसमें कैट ने उनकी निलंबन के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि आपराधिक मामले में लंबित जांच की आड़ में किसी अधिकारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है।
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आदेश के अनुसार याची का निलंबन अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 3 के उप खंड (8) रद्द किया जाता है। इस नियम के अनुसार निलंबन के आदेश की संबंधित समीक्षा समिति द्वारा निश्चित अंतराल पर की जानी चाहिए। इसके जारी होने की तारीख से 60 दिनों की अवधि के भीतर, ऐसा न करने पर निलंबन आदेश के 60 दिनों की अवधि पूरी होने की तारीख से इसे निरस्त मानने का प्रावधान है।
उमरानंगल ने अपनी याचिका में कहा था कि वर्तमान मामले में उनके निलंबन का विस्तार आदेश निलंबन के प्रारंभिक आदेश के 632 दिनों की अवधि के बाद जारी किया गया है। बहाली के लिए उनकी याचिका को खारिज करते हुए कैट ने नियम 3 के उप-खंड (1बी) और 21 दिसंबर के संशोधन पर विचार नहीं किया जो विशेष रूप से निलंबन की अवधि से संबंधित है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 2 फरवरी को याचिकाकर्ता के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया था और साथ ही उसे सेवा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि आदेश के अनुसार उन्हें सेवा में ले लिया गया है। हाईकोर्ट ने निलंबन अवधि के लंबित वेतन पर जवाब मांगा तो मोहलत मांगी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि अब स्पष्टीकरण देने जैसा कुछ नहीं बचा है। अगली सुनवाई पर या तो आदेश का पालन हो या अवमानना की कार्रवाई के लिए गृह सचिव खुद हाजिर रहें।
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